विदेशी वसीयत पर पटियाला हाउस कोर्ट का बड़ा फैसला, आनंद निकेतन की प्रॉपर्टी पर बेटी-दामाद को मिला हक

दिल्ली की एक अदालत ने संपत्ति विवाद में एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए विदेशी वसीयत (Foreign Will) को मान्यता दी है। पटियाला हाउस कोर्ट ने दक्षिण दिल्ली के पॉश इलाके आनंद निकेतन में स्थित एक प्रॉपर्टी के लिए 'लेटर ऑफ एडमिनिस्ट्रेशन' जारी किया है। इस फैसले के बाद अब संबंधित संपत्ति पर बेटी और दामाद को समान मालिकाना हक मिल गया है।
यह पूरा मामला मलेशिया में तैयार की गई एक वसीयत से जुड़ा है। दरअसल, यह संपत्ति स्वर्गीय सतिंदर कुमार पुरी ने साल 2003 में दिल्ली विकास प्राधिकरण (DDA) के जरिए एक रजिस्टर्ड सेल डीड के माध्यम से खरीदी थी। उनकी मृत्यु के बाद, उनके वारिसों—डिंपल पुरी और थायलन गौरी मुहुंदन ने कानूनी तौर पर अपना दावा पेश किया और संपत्ति के अधिकारों की मांग की।
मलेशियाई वसीयत को मिली कानूनी मान्यता
अदालत ने मामले की सुनवाई के दौरान मलेशिया में लिखी गई वसीयत की वैधता को स्वीकार किया। कोर्ट ने माना कि संपत्ति के वितरण के लिए यह दस्तावेज मान्य है, जिसके आधार पर लेटर ऑफ एडमिनिस्ट्रेशन जारी करने का आदेश दिया गया।
कानूनी जानकारों के मुताबिक, यह मामला इसलिए अहम है क्योंकि भारतीय साक्ष्य अधिनियम (Indian Evidence Act) के तहत वसीयत के निष्पादन और सत्यापन के लिए बहुत सख्त प्रक्रियाएं होती हैं। हालांकि, इस मामले में अदालत ने उपलब्ध दस्तावेजों के आधार पर वारिसों के अधिकारों को बरकरार रखा और संपत्ति के हस्तांतरण का रास्ता साफ किया। अब इस फैसले से यह स्पष्ट हो गया है कि भारत में स्थित अचल संपत्ति के मामले में विदेशी वसीयत को भी कुछ शर्तों के साथ मान्यता दी जा सकती है।