Pathways World School गुरुग्राम ने शिक्षा में AI के जिम्मेदार इस्तेमाल के लिए बनाया नया फ्रेमवर्क
गुरुग्राम के Pathways World School ने शिक्षा में AI के जिम्मेदार इस्तेमाल के लिए नया फ्रेमवर्क तैयार किया है। जानें कैसे बदलेगा पढ़ाई का तरीका।

आज के दौर में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) जिस तेजी से बदल रहा है, उसे देखते हुए गुरुग्राम का Pathways World School अब एक नई पहल कर रहा है। स्कूल ने शिक्षा में AI के जिम्मेदार एकीकरण के लिए एक व्यापक और व्यवस्थित फ्रेमवर्क तैयार किया है। स्कूल का मानना है कि AI को पूरी तरह प्रतिबंधित करना या बिना किसी रोक-टोक के इस्तेमाल करने देना, दोनों ही सही विकल्प नहीं हैं। इसीलिए, उन्होंने एक ऐसा रास्ता चुना है जहाँ तकनीक का इस्तेमाल समझदारी और जिम्मेदारी के साथ किया जाए।
इस पूरी योजना को सफल बनाने के लिए स्कूल ने केवल प्रशासन पर भरोसा नहीं किया, बल्कि इसमें छात्रों, शिक्षकों, आईटी स्टाफ और अभिभावकों को भी शामिल किया। डायरेक्टर प्रणय जैन और स्कूल डायरेक्टर मैल्कम निकोलसन के नेतृत्व में इस पहल को आगे बढ़ाया गया। इस पॉलिसी को आकार देने के लिए ईब्लाना लर्निंग की को-फाउंडर और पूर्व आईबी (IB) करिकुलम लीडर रीता बेट्सन की मदद ली गई। 25 और 26 सितंबर को आयोजित एक दो-दिवसीय वर्कशॉप में डेटा प्राइवेसी, रिस्क मैनेजमेंट, गवर्नेंस और छात्रों की वेलबीइंग जैसे अहम मुद्दों पर गहन चर्चा की गई।
शिक्षक रहेंगे केंद्र में, छात्रों को सिखाया जाएगा AI का सही उपयोग
स्कूल की यह पॉलिसी पूरी तरह से 'टीचर-सेंट्रिक' है। इसका मतलब है कि क्लास में क्या पढ़ाया जाएगा और उसका मूल्यांकन कैसे होगा, इस पर अंतिम फैसला शिक्षकों का ही होगा। शिक्षक खुद छात्रों के सामने तकनीक के जिम्मेदार उपयोग का उदाहरण पेश करेंगे। इस फ्रेमवर्क के मुख्य सिद्धांतों में अकादमिक ईमानदारी, डेटा की गोपनीयता और छात्रों की सुरक्षा को प्राथमिकता दी गई है। छात्रों को यह सिखाया जाएगा कि वे AI में मौजूद पक्षपात (bias) को कैसे पहचानें और अपने काम में पारदर्शिता कैसे बनाए रखें।
स्कूल डायरेक्टर मैल्कम निकोलसन ने स्पष्ट किया कि इस कदम का उद्देश्य ऐसे नियम और गाइडलाइन्स बनाना है, जिससे छात्र AI का सहारा लेकर अपनी सोचने की क्षमता को कम न करें, बल्कि इसका उपयोग और अधिक गहराई से सोचने और सीखने के लिए करें।
अब स्कूल इस पॉलिसी के अंतिम चरणों में है और जल्द ही क्लासरूम पायलट प्रोजेक्ट्स शुरू किए जाएंगे ताकि यह देखा जा सके कि ये टूल्स वास्तव में कितने प्रभावी हैं। इसके बाद, छात्रों, शिक्षकों और अभिभावकों के लिए ओरिएंटेशन प्रोग्राम आयोजित किए जाएंगे, ताकि सभी को AI की क्षमताओं और उसकी सीमाओं की सही समझ हो सके।