विरोध प्रदर्शनों के बीच दिल्ली में 20,000 अर्धसैनिक बल तैनात, महीने भर रहेंगे अलर्ट

Kittu Kumari12 October 20262 min read0 viewsDelhi Local
विरोध प्रदर्शनों के बीच दिल्ली में 20,000 अर्धसैनिक बल तैनात, महीने भर रहेंगे अलर्ट

राजधानी दिल्ली में चुनाव आयोग की मतदाता सूची संशोधन प्रक्रिया को लेकर छिड़े विवाद और बढ़ते विरोध प्रदर्शनों के बीच सुरक्षा व्यवस्था बेहद कड़ी कर दी गई है। गृह मंत्रालय ने दिल्ली पुलिस की मदद के लिए करीब 20,000 अर्धसैनिक बलों (CAPF) को अगले एक महीने तक शहर में ही तैनात रहने के आदेश दिए हैं। स्थानीय पुलिस और अर्धसैनिक बलों को मिलाकर सुरक्षा घेरे में कुल 40,000 जवान तैनात रहेंगे, ताकि किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटा जा सके।

यह पूरा मामला चुनाव आयोग द्वारा मतदाता सूचियों के विशेष गहन संशोधन में गड़बड़ी के आरोपों से जुड़ा है। विपक्षी दलों और INDIA गठबंधन का दावा है कि इस प्रक्रिया के कारण 2025 से अब तक करीब 13 करोड़ नाम हटा दिए गए हैं। इसी मुद्दे पर सड़कों पर भारी आक्रोश देखा जा रहा है। हालात इतने तनावपूर्ण रहे कि 10 अक्टूबर को करीब 7,000 लोगों को एहतियातन हिरासत में लिया गया।

सुप्रीम कोर्ट में याचिका और कड़े प्रतिबंध

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विरोध की इस लहर के बीच 12 अक्टूबर 2026 को राहुल गांधी ने एक बड़ा कदम उठाते हुए सुप्रीम कोर्ट तक मार्च किया। उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और चुनाव आयोग के खिलाफ 124 पन्नों की एक याचिका दायर की है। इस बीच, सुरक्षा कारणों से दिल्ली पुलिस ने जंतर-मंतर पर प्रदर्शन की अनुमति नहीं दी है और प्रदर्शनकारियों को केवल रामलीला मैदान, बुरारी ग्राउंड और पूर्वी दिल्ली के CBD ग्राउंड तक सीमित रखा गया है।

सुरक्षा व्यवस्था का असर आम जनजीवन पर भी पड़ा, जहां 12 अक्टूबर को शाम 5 बजे तक छह मेट्रो स्टेशन बंद रहे। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार और दिल्ली पुलिस को चेतावनी दी है कि कानून-व्यवस्था के नाम पर यातायात और मेट्रो सेवाओं पर पूरी तरह प्रतिबंध लगाना जायज नहीं है।

इस आंदोलन में कॉकरोच जनता पार्टी, विभिन्न छात्र संघ और भारतीय किसान यूनियन जैसे संगठन शामिल हैं, जो मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं। वहीं, एमनेस्टी इंटरनेशनल इंडिया जैसे मानवाधिकार संगठनों ने सरकार द्वारा की जा रही मनमानी गिरफ्तारियों और प्रतिबंधों की कड़ी आलोचना की है।

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