हरियाणा के किसान की अनोखी सफलता: मशरूम की खेती से सालाना 20 लाख की कमाई, पत्नी ने छोड़ी सरकारी नौकरी

हरियाणा के पंचकूला जिले के मोरनी हिल्स के रहने वाले 57 वर्षीय किसान विजेंद्र बाजवान ने खेती में सफलता की नई मिसाल कायम की है। वे मशरूम की खेती से हर साल 20 लाख रुपये कमा रहे हैं। उनकी इस कामयाबी से प्रभावित होकर उनकी पत्नी ने भी अपनी सरकारी नौकरी छोड़ दी है और अब वे पूरी तरह से इस बिजनेस में अपने पति का साथ दे रही हैं।
सफलता और विशेषज्ञता
विजेंद्र बाजवान की कंपनी मशरूम उत्पादन के साथ-साथ उससे जुड़े अन्य वैल्यू-एडेड प्रोडक्ट्स भी बनाती है। उनकी विशेषज्ञता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि उन्हें 1 लाख छात्रों को 'गैनोडर्मा' (Ganoderma) मशरूम की खेती सिखाने की जिम्मेदारी सौंपी गई है। वे अपने क्षेत्र में मशरूम के उत्पादन और मार्केटिंग का काम काफी बड़े स्तर पर संभाल रहे हैं।
सरकारी योजनाओं का लाभ
मशरूम की खेती को बढ़ावा देने के लिए सरकार की ओर से बड़ी मदद दी जा रही है। हरियाणा बागवानी विभाग किसानों को ट्रेनिंग देने के साथ-साथ पाश्चुरीकृत मशरूम कंपोस्ट भी उपलब्ध कराता है। नेशनल हॉर्टिकल्चर बोर्ड (NHB) द्वारा खेती के लिए 40 से 50 फीसदी तक कैपिटल सब्सिडी दी जाती है, जो 30 लाख रुपये तक हो सकती है। इसके अलावा, नाबार्ड (NABARD) से 25 लाख रुपये तक का कृषि लोन भी लिया जा सकता है।
सब्सिडी और रोजगार के अवसर
सरकार की ओर से कई तरह की आर्थिक योजनाएं चलाई जा रही हैं, जिनमें प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम (PMEGP) भी शामिल है। हरियाणा सरकार मशरूम उत्पादन इकाइयों के लिए 75 से 85 फीसदी तक सब्सिडी दे रही है, साथ ही हरियाणा हॉर्टिकल्चर मिशन (NHM) के तहत 20 लाख रुपये तक की कैपिटल सब्सिडी का प्रावधान है। ये सरकारी योजनाएं युवाओं और किसानों के लिए मशरूम के व्यवसाय को एक लाभकारी विकल्प बनाती हैं।