पाकिस्तान में पराली जलने से दिल्ली-NCR की हवा हुई जहरीली, AQI 451 के पार
पाकिस्तान के पंजाब में पराली जलने से दिल्ली-NCR में प्रदूषण बढ़ रहा है। AQI 451 पार, GRAP-2 लागू।

दिल्ली और एनसीआर के लोगों के लिए आने वाले दिन मुश्किल भरे हो सकते हैं। राजधानी की हवा पहले से ही जहरीली है और अब पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में बड़े पैमाने पर पराली जलने के कारण प्रदूषण का स्तर और अधिक बढ़ने की आशंका है। उत्तर-पश्चिमी हवाएं पाकिस्तान से धुएं को उड़ाकर दिल्ली-NCR की ओर ला रही हैं, जिससे यहां स्वास्थ्य संकट गहरा सकता है।
नासा के 'फायर इंफॉर्मेशन फॉर रिसोर्स मैनेजमेंट सिस्टम' (FIRMS) के आंकड़ों ने चौंकाने वाले खुलासे किए हैं। 1 अक्टूबर से 29 अक्टूबर 2026 के बीच पाकिस्तान के पंजाब में 13,241 फायर स्पॉट दर्ज किए गए, जो भारतीय पंजाब में दर्ज 3,158 घटनाओं के मुकाबले करीब 4.2 गुना ज्यादा हैं। इस भारी मात्रा में पराली जलने का सीधा असर दिल्ली की वायु गुणवत्ता पर पड़ रहा है।
3 नवंबर 2026 तक दिल्ली का समग्र वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) 451 तक पहुंच गया है। हालात इतने खराब हैं कि जहांगीरपुरी जैसे इलाकों में यह स्तर 452 तक दर्ज किया गया है। प्रदूषण की इस गंभीर स्थिति को देखते हुए कमीशन फॉर एयर क्वालिटी मैनेजमेंट (CAQM) ने 2 नवंबर को पूरे एनसीआर में ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान (GRAP) के स्टेज-II को लागू कर दिया है।
प्रदूषण रोकने के लिए प्रशासन ने कसी कमर
बढ़ते प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए प्रशासन ने कई कड़े कदम उठाए हैं। फिलहाल धूल उड़ाने वाले निर्माण कार्यों और तोड़फोड़ पर पूरी तरह रोक लगा दी गई है। इसके अलावा, अंतरराज्यीय सीमाओं पर वाहनों की चेकिंग तेज कर दी गई है ताकि नॉन-BS-VI वाहनों का प्रवेश रोका जा सके। सड़कों को साफ रखने के लिए रोजाना मैकेनिकल वैक्यूम स्वीपिंग की जा रही है और व्यस्त रास्तों पर पानी के छिड़काव के साथ डस्ट सप्रेसेंट्स का इस्तेमाल किया जा रहा है।
वहीं, 7-8 नवंबर को आने वाले दिवाली त्योहार को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने भी सख्त निर्देश दिए हैं। कोर्ट ने केवल प्रमाणित 'ग्रीन' पटाखों के इस्तेमाल की अनुमति दी है। इसके साथ ही पटाखों के लिए समय सीमा तय की गई है और अस्पतालों के 300 मीटर के दायरे में किसी भी तरह के पटाखे चलाने पर पूरी तरह पाबंदी लगाई गई है।