रेस कोर्स मस्जिद विध्वंस: ओवैसी ने केंद्रीय मंत्री किरण रिजिजू से मांगी मदद

नई दिल्ली की ऐतिहासिक रेस कोर्स मस्जिद विध्वंस की खबरों के बीच AIMIM चीफ असदुद्दीन ओवैसी ने मोर्चा खोल दिया है। ओवैसी ने केंद्रीय अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री किरण रिजिजू से इस मामले में तुरंत हस्तक्षेप करने की अपील की है, ताकि इस पुरानी और महत्वपूर्ण मस्जिद को तोड़े जाने से बचाया जा सके।
पूरा मामला तब गरमाया जब लैंड एंड डेवलपमेंट ऑफिस (L&DO) ने सोमवार, 19 अक्टूबर 2026 को एक बेदखली नोटिस जारी किया। नोटिस में मस्जिद के परिसर को अनधिकृत बताया गया है और वहां से छह दिनों के भीतर हटने का आदेश दिया गया है। ओवैसी का कहना है कि यह मस्जिद 1977 से ही एक गजेटेड वक्फ संपत्ति रही है। उन्होंने इस बात पर हैरानी जताई कि दिल्ली वक्फ बोर्ड, जो 2023 से गठित नहीं हुआ है, इस गंभीर मुद्दे पर पूरी तरह खामोश क्यों है।
विवाद की जड़ और मस्जिद का इतिहास
मस्जिद से जुड़े विवादों की शुरुआत 7 अक्टूबर 2026 को हुई, जब वहां की बिजली और पानी की सप्लाई काट दी गई और सभी प्रवेश द्वारों को बंद कर दिया गया। मस्जिद के इमाम मोहम्मद हारून, जो पिछले 40 सालों से वहां सेवा दे रहे हैं, का आरोप है कि L&DO के अधिकारी कुणाल भास्कर ने हाल ही में वहां आकर मस्जिद को ढहाने की धमकी दी थी।
इमाम हारून ने स्पष्ट किया कि यह कोई अवैध निर्माण नहीं, बल्कि एक कानूनी विरासत स्थल है। यह NDMC की हेरिटेज लिस्ट में सीरियल नंबर 22 और 1977 के दिल्ली गजट में सीरियल नंबर 18 पर दर्ज है। साथ ही, 2021 के एक सर्वे में भी इसे क्लियर किया गया था।
इस तनावपूर्ण स्थिति के बीच जमीयत उलमा-ए-हिंद के एक प्रतिनिधिमंडल ने, जिसका नेतृत्व महासचिव मौलाना मोहम्मद हकीमुद्दीन कासमी कर रहे थे, मंत्री किरण रिजिजू से मुलाकात की। उन्होंने एक ज्ञापन सौंपकर मस्जिद और उससे सटे कब्रिस्तान की सुरक्षा की मांग की है।
दूसरी ओर, ओवैसी ने वक्फ संशोधन अधिनियम के तहत इस मस्जिद को 'वक्फ बाय यूजर' के रूप में संरक्षित बताया और दिल्ली वक्फ बोर्ड के सीईओ की आलोचना की कि उन्होंने बेदखली के आदेशों को अदालत में चुनौती क्यों नहीं दी। वहीं, आम आदमी पार्टी के विधायक और पूर्व वक्फ बोर्ड अध्यक्ष अमानतुल्लाह खान ने भी इस घटना पर चिंता जताई है और जल्द ही मौके का दौरा करने की बात कही है।