जंतर मंतर पर तिरंगा लहराना अपराध? CJP कार्यकर्ताओं की गिरफ्तारी पर एकजुट हुआ विपक्ष

Kittu Kumari14 October 20262 min read0 viewsDelhi Local
जंतर मंतर पर तिरंगा लहराना अपराध? CJP कार्यकर्ताओं की गिरफ्तारी पर एकजुट हुआ विपक्ष

देश की राजधानी दिल्ली के जंतर मंतर पर विरोध प्रदर्शन के दौरान तिरंगा लहराने वाले कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के दो कार्यकर्ताओं की गिरफ्तारी ने अब एक बड़े राजनीतिक विवाद का रूप ले लिया है। सौरभ दास और आशुतोष रंका को न्यायिक हिरासत में भेजे जाने के बाद विपक्षी दलों ने केंद्र सरकार और पुलिस कार्रवाई के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। विपक्षी नेताओं का सीधा सवाल है कि क्या अपने ही देश में राष्ट्रीय ध्वज फहराना अब अपराध बन गया है?

आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक और दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने इस कार्रवाई को पूरी तरह से 'बेतुका' करार दिया है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर अपनी नाराजगी जताते हुए पूछा कि क्या अपने देश में अपना झंडा लहराना कोई जुर्म है? वहीं, लोक सभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने इस कदम को 'कायरता' का प्रतीक बताया। राहुल गांधी ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि जंतर मंतर पर शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन के दौरान तिरंगा लहराना कोई अपराध नहीं है और युवाओं को इस तरह जेल भेजना गलत है। उन्होंने जोर देकर कहा कि जंतर मंतर भारत के लोगों का है और वे इसे वापस reclaim करेंगे।

विपक्षी नेताओं ने दी कानूनी मदद की पेशकश

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इस मामले में केवल दिल्ली के नेता ही नहीं, बल्कि दक्षिण भारत से लेकर महाराष्ट्र तक के दिग्गजों ने अपनी आवाज उठाई है। तमिलनाडु के पूर्व मुख्यमंत्री और डीएमके अध्यक्ष एमके स्टालिन ने चेतावनी दी कि प्रदर्शनकारियों को जेल भेजने से जनता का आक्रोश और बढ़ेगा। स्टालिन ने गिरफ्तार युवाओं के प्रति एकजुटता दिखाते हुए कहा कि डीएमके उन्हें हर संभव कानूनी सहायता और प्रतिनिधित्व प्रदान करने के लिए तैयार है। उन्होंने सवाल किया कि सरकार कितने युवाओं की आवाज को दबा सकती है।

शिव सेना (UBT) के नेता आदित्य ठाकरे ने भी इस कार्रवाई को लोकतंत्र पर हमला बताया। उन्होंने कहा कि जब से युवा भारतीयों द्वारा राष्ट्रीय ध्वज पकड़ना अपराध बन गया, तब से यह लड़ाई 'सत्ता बनाम देशभक्त युवा' की बन गई है। ठाकरे ने इसे तानाशाही करार देते हुए कहा कि लोकतंत्र को वापस पाने तक यह संघर्ष जारी रहेगा।

जानकारी के मुताबिक, CJP सदस्य अजिंक्य शिंदे ने बताया कि सौरभ दास और आशुतोष रंका को जंतर मंतर के पास प्रदर्शन के दौरान हिरासत में लिया गया था, जिसके बाद उन्हें पांच दिनों की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया। पार्टी ने साफ किया है कि इस तरह की कार्रवाई से कार्यकर्ता डरने वाले नहीं हैं।

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