वोटर लिस्ट से 13 करोड़ नाम हटाने पर बवाल, राहुल गांधी के नेतृत्व में दिल्ली में प्रदर्शन

देश की राजधानी दिल्ली एक बार फिर राजनीतिक गहमागहमी का केंद्र बन गई है। स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) प्रक्रिया के दौरान वोटर लिस्ट से करीब 13 करोड़ नामों के हटाए जाने के खुलासे के बाद विपक्षी दलों ने मोर्चा खोल दिया है। राहुल गांधी के नेतृत्व में 'इंडिया' (INDIA) गठबंधन और कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के कार्यकर्ताओं ने दिल्ली की सड़कों पर उतरकर चुनाव आयोग से जवाब मांगा है।
इस पूरे मामले को लेकर राहुल गांधी, मल्लिकार्जुन खड़गे, अखिलेश यादव और तेजस्वी यादव जैसे दिग्गज नेताओं ने सुप्रीम कोर्ट में एक रिट याचिका दायर की है। याचिका में मांग की गई है कि नामों को हटाने की इस प्रक्रिया की स्वतंत्र जांच हो और चुनाव आयोग के रिकॉर्ड सार्वजनिक किए जाएं। राहुल गांधी ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और अन्य अधिकारियों पर सीधा हमला बोलते हुए इसे 'वोट चोरी' करार दिया है। उनका आरोप है कि इस कदम के जरिए देश की लोकतांत्रिक प्रक्रिया को हाईजैक करने की कोशिश की जा रही है।
चुनाव आयोग की सफाई और पुलिस की सख्ती
दूसरी ओर, चुनाव आयोग ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि यह एक नियमित और कानूनी प्रक्रिया है। आयोग के मुताबिक, वोटर लिस्ट से केवल उन नामों को हटाया गया है जो फर्जी थे, जिनकी मृत्यु हो चुकी थी या जिनके नाम दो जगह दर्ज थे। जिला कलेक्टर जितेंद्र दुदी ने स्पष्ट किया कि इस सत्यापन का उद्देश्य लिस्ट को अधिक पारदर्शी और सटीक बनाना है। उन्होंने बताया कि ड्राफ्ट लिस्ट पर आपत्तियां 23 सितंबर तक ली गई थीं, जिनका निपटारा 22 अक्टूबर तक कर लिया जाएगा और फाइनल लिस्ट 27 अक्टूबर 2026 को जारी होगी।
इस विरोध प्रदर्शन को देखते हुए दिल्ली पुलिस पूरी तरह अलर्ट मोड पर रही। मध्य दिल्ली के इलाकों में भारी पुलिस बल तैनात किया गया और जगह-जगह लोहे के बैरिकेड्स लगाए गए। प्रशासन ने जंतर-मंतर को विरोध प्रदर्शन स्थल के रूप में डी-नोटिफाई कर दिया, जिसके बाद पुलिस ने सप्ताहांत में सैकड़ों प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया, हालांकि उनमें से कई को बाद में छोड़ दिया गया। गौरतलब है कि 5 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट ने पहले ही सरकार और चुनाव अधिकारियों को निर्देश दिया था कि पूरी रिवीजन प्रक्रिया पूरी पारदर्शिता के साथ संपन्न की जाए।