CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विपक्षी दलों का 'मॉक महाभियोग', दिल्ली में जुटेंगे सांसद

विपक्षी दलों ने वोटर लिस्ट में गड़बड़ी के आरोपों के बीच CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ दिल्ली में मॉक महाभियोग आयोजित करने की योजना बनाई है।

Kittu Kumari25 October 20262 min read0 viewsDelhi Local
CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विपक्षी दलों का 'मॉक महाभियोग', दिल्ली में जुटेंगे सांसद

देश की चुनावी प्रक्रिया और वोटर लिस्ट में कथित गड़बड़ियों को लेकर विपक्षी दलों का गुस्सा अब सड़क और सार्वजनिक मंचों पर उतरने वाला है। INDIA गठबंधन के बैनर तले विपक्षी दल 30 अक्टूबर 2026 को दिल्ली के होटल अशोक में मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार का एक 'मॉक महाभियोग' (प्रतीकात्मक महाभियोग) आयोजित करने की तैयारी कर रहे हैं। इस अनोखे विरोध प्रदर्शन के जरिए विपक्ष चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और वोटर लिस्ट के विशेष गहन संशोधन (Special Intensive Revision) पर गंभीर सवाल उठाना चाहता है।

कांग्रेस और उसके गठबंधन सहयोगियों ने इस कार्यक्रम में शामिल होने के लिए सभी विपक्षी सांसदों को आमंत्रित किया है। दरअसल, पिछले कुछ समय से वोटर लिस्ट में बदलाव और चुनावी अनियमितताओं के आरोपों ने राजनीतिक माहौल को गरमा दिया है। विपक्षी नेताओं का मानना है कि लोकतांत्रिक संस्थानों की निष्पक्षता पर सवाल उठ रहे हैं, और इस तरह के प्रदर्शन के जरिए वे जनता का ध्यान इन मुद्दों की ओर खींचना चाहते हैं।

प्रतीकात्मक विरोध और कानूनी पहलू

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संविधान विशेषज्ञों का कहना है कि किसी भी मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने की प्रक्रिया बेहद जटिल होती है और इसके लिए संसद में एक विशिष्ट बहुमत की आवश्यकता होती है। ऐसे में होटल अशोक में होने वाला यह कार्यक्रम कानूनी रूप से कोई असर नहीं रखेगा, लेकिन इसका राजनीतिक और प्रतीकात्मक महत्व काफी ज्यादा है। यह एक तरह का 'पॉलिटिकल थिएटर' है, जिसका मकसद चुनाव आयोग पर दबाव बनाना और अपनी शिकायतों को व्यापक स्तर पर प्रचारित करना है।

इस विरोध प्रदर्शन की गूँज पहले ही सुनाई देने लगी है। हाल ही में दिल्ली हाई कोर्ट ने उन लोगों की याचिका खारिज कर दी थी, जिन्हें इस तरह के प्रदर्शनों के चलते शांति बंधन (peace bond) नोटिस जारी किए गए थे। वहीं, दिल्ली पुलिस और सुरक्षा एजेंसियां अब इस आयोजन से जुड़े संभावित जोखिमों का आकलन कर रही हैं, ताकि होटल अशोक और आसपास के इलाकों में कानून-व्यवस्था बनी रहे।

फिलहाल, आयोजकों ने यह स्पष्ट नहीं किया है कि वे इस सत्र के दौरान CEC के खिलाफ क्या सबूत पेश करेंगे। हालांकि, यह पूरी कवायद इस बात का संकेत है कि चुनाव आयोग की स्वायत्तता और उसकी छवि को लेकर राजनीतिक टकराव अब और गहराने वाला है।

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