वोटर लिस्ट से नाम हटाने का विरोध: सुप्रीम कोर्ट पहुंचे विपक्षी दल, भारी प्रदर्शन

देश में वोटर लिस्ट से बड़े पैमाने पर नाम हटाए जाने के मुद्दे ने अब तूल पकड़ लिया है। सोमवार, 12 अक्टूबर 2026 को कांग्रेस के नेतृत्व में विपक्षी दलों ने दिल्ली की सड़कों पर उतरकर सुप्रीम कोर्ट तक मार्च निकाला। विपक्षी नेताओं का आरोप है कि वोटर लिस्ट में की जा रही यह 'सफाई' निष्पक्ष नहीं है और इसका सीधा फायदा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को पहुँचाने की कोशिश की जा रही है। इस विरोध प्रदर्शन के चलते राजधानी में सुरक्षा कड़ी कर दी गई और ट्रैफिक व्यवस्था को संभालने के लिए छह मेट्रो स्टेशन बंद करने पड़े।
विवाद की जड़ में चुनाव आयोग (ECI) द्वारा जून 2025 से शुरू किया गया 'स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन' (SIR) है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस प्रक्रिया के दौरान अब तक करीब 13 करोड़ से ज्यादा मतदाताओं के नाम लिस्ट से हटा दिए गए हैं। राहुल गांधी और प्रियंका गांधी सहित कई दिग्गज नेताओं ने इसे संविधान पर हमला बताया है। प्रदर्शनकारियों और 'कॉकरोच' युवा आंदोलन जैसे समूहों का कहना है कि यह पूरी प्रक्रिया राजनीति से प्रेरित है और इसमें पारदर्शिता की भारी कमी है। खासकर ग्रामीण और गरीब तबके के लोगों के लिए जरूरी दस्तावेज जुटाना मुश्किल हो रहा है, जिससे वे अपने मताधिकार से वंचित हो रहे हैं।
चुनाव आयोग में आंतरिक कलह और कानूनी लड़ाई
इस पूरे मामले में चुनाव आयोग के भीतर भी मतभेद की खबरें सामने आई हैं। बताया जा रहा है कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले दस महीनों में कम से कम 14 लिखित आपत्तियां दर्ज कराई हैं। उनका आरोप है कि SIR प्रक्रिया को लागू करने से पहले उचित परामर्श या औपचारिक मंजूरी नहीं ली गई थी। वहीं, कर्नाटक से आई एक रिपोर्ट के मुताबिक, करीब 29 हजार फॉर्म-7 (नाम हटाने के आवेदन) की जानकारी आधिकारिक वेबसाइट पर उपलब्ध नहीं थी, जबकि दावा किया गया था कि इसे सार्वजनिक किया जाएगा।
दूसरी ओर, चुनाव आयोग ने इन सभी आरोपों को खारिज किया है। आयोग का कहना है कि यह प्रक्रिया अनुच्छेद 324 और जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 के तहत एक कानूनी आवश्यकता है, ताकि डुप्लीकेट या अपात्र प्रविष्टियों को हटाया जा सके। आयोग ने स्पष्ट किया है कि नाम हटाना अंतिम फैसला नहीं है और लोग अपना पंजीकरण बहाल कराने के लिए दावा पेश कर सकते हैं। इसके लिए बूथ लेवल अधिकारियों (BLO) द्वारा घर-घर जाकर दस्तावेज जुटाने और हेल्प कैंप लगाने की बात भी कही गई है।
हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने मई 2026 में इस प्रक्रिया को वैध ठहराया था, लेकिन विपक्षी दलों ने अब मुख्य न्यायाधीश के समक्ष एक नई याचिका दायर की है। प्रदर्शनकारी मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं। गौरतलब है कि INDIA गठबंधन ने 1 नवंबर 2026 को फिर से बड़े विरोध प्रदर्शन की योजना बनाई है। फिलहाल, महाराष्ट्र के लिए दावे पेश करने की समय सीमा 12 अक्टूबर और दिल्ली के लिए 30 अक्टूबर तक बढ़ा दी गई है।