मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को हटाने की मांग, विपक्षी नेताओं ने उठाए गंभीर सवाल

नई दिल्ली। एक मीडिया रिपोर्ट सामने आने के बाद राजनीतिक गलियारों में खलबली मच गई है, जिसमें दावा किया गया है कि दो चुनाव आयुक्तों ने स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) प्रक्रिया से जुड़े फैसलों पर 10 महीनों में कम से कम 14 बार आपत्ति जताई थी। इस रिपोर्ट के आधार पर कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों ने मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया है और उन्हें तुरंत पद से हटाने की मांग की है। कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा कि मुख्य चुनाव आयुक्त को पद पर बने रहने का कोई अधिकार नहीं है और उनके फैसलों से लोकतंत्र खतरे में पड़ गया है। अधिक जानकारी के लिए The Indian Express की रिपोर्ट देखी जा सकती है।
आरजेडी सांसद मनोज झा ने भी इस मामले पर प्रतिक्रिया दी और कहा कि रिपोर्ट से चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े होते हैं। मनोज झा ने आरोप लगाया कि सीईसी ज्ञानेश कुमार ने अन्य अधिकारियों की आपत्तियों को नजरअंदाज किया और अगर वह पद पर बने रहे तो जनता का बचा हुआ भरोसा भी खत्म हो जाएगा। समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने भी इस मामले में सुप्रीम कोर्ट से स्वतः संज्ञान लेने की अपील की है। अखिलेश यादव ने एक्स पर पोस्ट कर कहा कि दो चुनाव आयुक्तों का 14 बार आपत्तियां दर्ज कराना यह साबित करता है कि आयोग के सभी सदस्य अपने कर्तव्यों का सही से पालन करने में असमर्थ हैं।
तृणमूल कांग्रेस सांसद डेरेक ओब्रायन ने कहा कि राज्यसभा के साठ से अधिक सांसदों द्वारा सीईसी को हटाने के लिए पहले दिए गए प्रस्ताव को अब फिर से आगे लाया जाना चाहिए। डेरेक ओब्रायन ने लोकतंत्र को बचाने के लिए सीईसी पर महाभियोग चलाने की बात कही। वहीं, राज्यसभा सांसद कपिल सिब्बल ने आरोप लगाया कि ज्ञानेश कुमार बहुमत के बिना मनमाने ढंग से फैसले ले रहे थे। कपिल सिब्बल ने कहा कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने कई मौकों पर सीईसी की कार्यशैली पर सवाल उठाए थे।
शिवसेना (यूबीटी) सांसद संजय राज ने भी सीईसी के खिलाफ कार्रवाई की मांग करते हुए कहा कि ज्ञानेश कुमार को निलंबित किया जाना चाहिए। संजय राउत ने गृह मंत्रालय और सरकार पर भी निशाना साधा। इसके अलावा, माकपा सांसद जॉन ब्रिटास ने चुनाव आयोग को एक व्यक्ति की तानाशाही करार दिया। जॉन ब्रिटास ने कहा कि चुनाव आयोग अब वह संस्था नहीं रही क्योंकि दो चुनाव आयुक्तों ने दस महीनों में चौदह बार औपचारिक रूप से आपत्ति जताई है। अप्रैल महीने में भी विपक्षी दलों ने साबित कदाचार के आधार पर सीईसी को हटाने का नोटिस दिया था, जिसे बाद में खारिज कर दिया गया था।