किताबें जीवन बदलने का सशक्त माध्यम, समाज में लाती हैं सकारात्मक बदलाव: ओम बिरला

कोच्चि इंटरनेशनल बुक फेस्टिवल में लोक सभा अध्यक्ष ओम बिरला ने किताबों के महत्व और राष्ट्रीय एकता पर जोर दिया।

Kittu Kumari30 October 20262 min read0 viewsNational
किताबें जीवन बदलने का सशक्त माध्यम, समाज में लाती हैं सकारात्मक बदलाव: ओम बिरला

लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने किताबों को केवल जानकारी का स्रोत नहीं, बल्कि जीवन को बदलने और समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाने वाला एक शक्तिशाली माध्यम बताया है। उन्होंने कहा कि आज के दौर में तकनीक ने जानकारी तक पहुंच तो आसान कर दी है, लेकिन वास्तविक ज्ञान और बुद्धिमत्ता आज भी किताबों और जीवन के अनुभवों से ही आती है।

कोच्चि में आयोजित 29वें कोच्चि इंटरनेशनल बुक फेस्टिवल के उद्घाटन समारोह को संबोधित करते हुए ओम बिरला ने कहा कि किताबों का कोई विकल्प नहीं है। पढ़ने की आदत न केवल व्यक्ति को समृद्ध बनाती है, बल्कि उसमें जिज्ञासा, संवेदनशीलता और जीवन को अलग-अलग नजरियों से देखने की क्षमता भी विकसित करती है। उन्होंने जोर देकर कहा कि डिजिटल तकनीक सूचनाएं दे सकती है, लेकिन गहरी समझ और संवेदनशीलता के लिए किताबें और मानवीय अनुभव ही अनिवार्य हैं।

विविधता में एकता और लोकतंत्र की ताकत

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भारत की विविधता पर चर्चा करते हुए ओम बिरला ने कहा कि अलग-अलग भाषाएं, धर्म, परंपराएं और जीवन जीने के तरीके ही देश की असली ताकत हैं। उन्होंने कहा कि इन भिन्नताओं के बावजूद भारत एकजुट है और लोकतंत्र वह सबसे बड़ी शक्ति है जो पूरे राष्ट्र को बांधकर रखती है। लोकतंत्र हमें अलग-अलग विचारधाराओं और मतों का सम्मान करना सिखाता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि राय अलग हो सकती है, लेकिन जब बात राष्ट्रहित की आती है, तो सभी नागरिकों को एकजुट रहना चाहिए।

भाषा और साहित्य की भूमिका पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि भाषाएं लोगों को बांटती नहीं, बल्कि जोड़ती हैं। उन्होंने मलयालम, कन्नड़ और तेलुगु जैसी समृद्ध भाषाई परंपराओं के योगदान की सराहना की, जिन्होंने भारत की सांस्कृतिक और बौद्धिक विरासत को संजोकर रखा है।

केरल की उपलब्धियों का जिक्र करते हुए ओम बिरला ने इसे देश का पहला पूर्ण साक्षर राज्य बताया। उन्होंने शिक्षा, विज्ञान और तकनीक में केरल के योगदान की प्रशंसा की और विशेष रूप से स्वास्थ्य सेवा और नर्सिंग के क्षेत्र में केरल की महिलाओं के वैश्विक योगदान को सराहा। उन्होंने पी.एन. पणिक्कर के पुस्तकालय आंदोलन और 'वायाना दिनम' (पठन दिवस) जैसे प्रयासों की भी सराहना की, जिन्होंने समाज में पढ़ने की संस्कृति को बढ़ावा दिया है।

अंत में, उन्होंने कोच्चि इंटरनेशनल बुक फेस्टिवल के आयोजकों को बधाई देते हुए उम्मीद जताई कि यह आयोजन नई पीढ़ी को पढ़ने के लिए प्रेरित करेगा और एक अधिक जागरूक और संवेदनशील समाज के निर्माण में मदद करेगा। इस अवसर पर इसरो के पूर्व अध्यक्ष एस. सोमनाथ और साहित्य अकादमी के सचिव वरुण गुला सहित कई गणमान्य व्यक्ति मौजूद थे।

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