ओखला में वोटर लिस्ट की बड़ी गड़बड़ी: पब्लिक ऑडिट में 100 से ज्यादा गलत एंट्रीज का खुलासा

दिल्ली के ओखला निर्वाचन क्षेत्र में मतदाता सूची की शुद्धता को लेकर एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। एक पब्लिक ऑडिट के दौरान यह बात उभरकर आई है कि दो पोलिंग बूथों की वोटर लिस्ट में 100 से अधिक मतदाताओं को गलत तरीके से चिह्नित किया गया है। यह घटना उस समय सामने आई है जब चुनाव आयोग अपनी स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन प्रक्रिया के जरिए सूचियों को अपडेट कर रहा है। ओखला वोटर लिस्ट गड़बड़ी ने अब चुनावी तैयारियों और डेटा की सटीकता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
इस गड़बड़ी का पता तब चला जब स्वयंसेवकों ने अक्टूबर के मध्य में सात दिनों तक एक ऑडिट अभियान चलाया। इस दौरान उन्होंने 258 घरों का सर्वे किया, जिसमें यह पाया गया कि बड़ी संख्या में लोगों को 'ASDD' यानी अनुपस्थित (Absent), शिफ्टेड (Shifted), मृत (Dead) या डुप्लीकेट (Duplicate) श्रेणी में डाल दिया गया था, जबकि वास्तव में वे वहां मौजूद थे और मतदान के योग्य थे।
लोकतांत्रिक अधिकारों पर असर और राजनीतिक हलचल
सिविल सोसाइटी के सदस्यों का कहना है कि घने शहरी इलाकों में आधिकारिक प्रक्रियाओं से कई बार चूक हो जाती है, इसलिए इस तरह के स्वतंत्र ऑडिट जरूरी हैं। अगर वोटर लिस्ट में ऐसी गलतियां रहती हैं, तो असली मतदाता अपने लोकतांत्रिक अधिकार से वंचित हो सकते हैं। वहीं, विपक्षी दलों ने भी इस मुद्दे को उठाते हुए वोटर लिस्ट की ईमानदारी और चुनाव आयोग की रिवीजन पद्धति की सटीकता पर सवाल उठाए हैं।
पारदर्शिता के पैरोकारों का मानना है कि आयोग भले ही उच्च मानकों का दावा करे, लेकिन जमीनी स्तर पर लॉजिस्टिक चुनौतियों के कारण ऐसी त्रुटियां होती हैं। अब सबसे बड़ा बोझ उन नागरिकों पर पड़ता है जिनके नाम गलत तरीके से हटा दिए गए हैं, क्योंकि उन्हें दोबारा अपनी पात्रता साबित करनी होगी।
फिलहाल, प्रभावित मतदाता चुनाव आयोग की प्रतिक्रिया का इंतजार कर रहे हैं ताकि अंतिम सूची जारी होने से पहले इन गलतियों को सुधारा जा सके। उम्मीद है कि आने वाले समय में दावों और आपत्तियों के लिए एक समर्पित अवधि दी जाएगी, जिससे यह सुनिश्चित हो सके कि अंतिम वोटर लिस्ट पूरी तरह सटीक हो। इस घटना के बाद अब दिल्ली के अन्य निर्वाचन क्षेत्रों में भी इसी तरह के ऑडिट की मांग उठ सकती है।