नूंह के हरे प्याज से दिल्ली की मंडियों में रौनक, 7720 हेक्टेयर में हो रही खेती

नूंह के किसानों ने 7720 हेक्टेयर में की प्याज की खेती, दिल्ली की मंडियों में बढ़ी रौनक और बागवानी विभाग दे रहा अनुदान।

Kittu Kumari29 October 20262 min read0 viewsNCR
नूंह के हरे प्याज से दिल्ली की मंडियों में रौनक, 7720 हेक्टेयर में हो रही खेती

हरियाणा के मेवात क्षेत्र यानी नूंह जिले के किसानों की मेहनत अब दिल्ली की मंडियों में रंग ला रही है। दिल्ली के बाजारों में इन दिनों नूंह के हरे प्याज की जबरदस्त मांग देखी जा रही है, जिससे न केवल मंडियों में रौनक बढ़ी है बल्कि स्थानीय किसानों की कमाई के रास्ते भी खुले हैं। जिले के किसानों ने इस साल बड़े पैमाने पर प्याज की फसल उगाई है, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति में सुधार हो रहा है।

आंकड़ों की बात करें तो इस साल नूंह जिले में करीब 7720 हेक्टेयर क्षेत्र में प्याज की खेती की गई है। जिला बागवानी अधिकारी डॉ. अब्दुल रज्जाक के मुताबिक, नूंह की मिट्टी और यहां की जलवायु प्याज की फसल के लिए बेहद अनुकूल है। जिले के फिरोजपुर झिरका समेत पाटूखेड़ी, रवा, बघोला, महूं, तिगांव और रनियाला जैसे कई गांवों में किसान बड़े स्तर पर प्याज उगा रहे हैं। किसान अपनी उपज को ट्रकों और अन्य वाहनों के जरिए दिल्ली की मंडियों तक पहुंचा रहे हैं, जबकि कुछ लोग इसे स्थानीय बाजारों में भी बेच रहे हैं।

आधुनिक तकनीक और सरकारी अनुदान का लाभ

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बागवानी विभाग न केवल खेती को बढ़ावा दे रहा है, बल्कि किसानों को आधुनिक कृषि तकनीकों और सूक्ष्म सिंचाई पद्धति (Micro Irrigation) अपनाने के लिए भी प्रेरित कर रहा है। विभाग का लक्ष्य है कि किसान पानी की बचत करें और खेती की लागत को कम करें।

  • बड़ा अनुदान: सूक्ष्म सिंचाई तकनीक अपनाने वाले किसानों को निर्धारित नियमों के तहत प्रति एकड़ 15 हजार रुपये तक का अनुदान दिया जा रहा है।
  • पंजीकरण अनिवार्य: सरकारी योजनाओं का लाभ उठाने के लिए किसानों को 'मेरी फसल मेरा ब्यौरा' पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन कराना जरूरी है।
  • वैज्ञानिक तरीका: विभाग द्वारा किसानों को वैज्ञानिक तरीके से खेती करने के लिए जागरूक किया जा रहा है ताकि पैदावार और गुणवत्ता दोनों बढ़ सकें।

डॉ. रज्जाक ने स्पष्ट किया कि अनुदान प्राप्त करने के लिए किसानों को आवश्यक दस्तावेजों के साथ आवेदन करना होगा और सरकार द्वारा तय की गई शर्तों को पूरा करना होगा। इस पहल से नूंह के किसान अब पारंपरिक खेती छोड़कर आधुनिक और मुनाफे वाले तरीकों की ओर बढ़ रहे हैं।

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