चुनाव धांधली के खिलाफ दिल्ली में NSUI का हल्लाबोल, कई कार्यकर्ता हिरासत में

देश की राजधानी दिल्ली में चुनावी गड़बड़ियों के आरोपों को लेकर माहौल गरमा गया है। नेशनल स्टूडेंट्स यूनियन ऑफ इंडिया (NSUI) के कार्यकर्ताओं ने मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर जोरदार प्रदर्शन किया। यह पूरा मामला 'वोट चोरी' के आरोपों से जुड़ा है, जिसके चलते कार्यकर्ताओं ने सड़कों पर उतरकर अपना विरोध जताया।
प्रदर्शन के दौरान राजीव चौक मेट्रो स्टेशन के गेट नंबर 7 पर भारी हंगामा देखने को मिला। यहां प्रदर्शनकारियों और दिल्ली पुलिस के बीच तीखी झड़प हुई, जिसमें महिला कार्यकर्ताओं के साथ धक्का-मुक्की की तस्वीरें भी सामने आई हैं। पुलिस ने कार्रवाई करते हुए NSUI के राष्ट्रीय अध्यक्ष विनोद जाखड़ और राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी रवि हनुमान पांडे समेत कई प्रदर्शनकारियों को हिरासत में ले लिया। संगठन ने साफ कर दिया है कि जब तक चुनाव आयुक्त इस्तीफा नहीं देते, उनका आंदोलन जारी रहेगा।
जंतर मंतर पर पाबंदी और पुलिस की सख्त कार्रवाई
दरअसल, यह तनाव तब बढ़ा जब दिल्ली पुलिस ने 12 अक्टूबर को जंतर मंतर पर विरोध प्रदर्शन की अनुमति वापस ले ली। इसके बाद जब कार्यकर्ता सड़कों पर उतरे, तो पुलिस ने उन्हें रोकने की पूरी कोशिश की। कनॉट प्लेस, तिलक मार्ग, बाराखंबा और मंदिर मार्ग पुलिस स्टेशनों में निषेधाज्ञा के उल्लंघन के आरोप में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 163 के तहत कई एफआईआर दर्ज की गई हैं।
सिर्फ NSUI ही नहीं, बल्कि कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेता सौरभ दास, आशुतोष रंका और अजिंक्य शिंदे को भी हिरासत में लिया गया, जब वे जंतर मंतर पहुंचने की कोशिश कर रहे थे। CJP के संस्थापक अभिजीत दिपके ने इस कार्रवाई की कड़ी निंदा करते हुए इसे 'तानाशाही मानसिकता' करार दिया है, क्योंकि उनके नेता राष्ट्रीय ध्वज लेकर चल रहे थे।
दूसरी ओर, राजनीतिक माहौल तब और तनावपूर्ण हो गया जब विपक्षी 'INDIA' गठबंधन के नेताओं, जिनमें राहुल गांधी भी शामिल थे, ने 12 अक्टूबर को 'लोकतंत्र के लिए मार्च' निकाला। चुनावी अनियमितताओं को लेकर सुप्रीम कोर्ट में एक संयुक्त याचिका भी दायर की गई है। राहुल गांधी ने मंगलवार को अपने आवास पर विपक्षी सांसदों और छात्र संगठनों के साथ एक बैठक भी की। फिलहाल, सुप्रीम कोर्ट ने विरोध प्रदर्शनों पर प्रतिबंध और मेट्रो सेवाओं में बाधा जैसी याचिकाओं पर सुनवाई 15 अक्टूबर तक के लिए टाल दी है।