जंतर मंतर प्रदर्शन में आम लोगों पर हमले का मामला: NSUI ने दिल्ली हाई कोर्ट से मांगी SIT जांच

10 अक्टूबर को जंतर मंतर और कनॉट प्लेस के आसपास हुए कथित हमलों को लेकर अब कानूनी मोड़ आ गया है। NSUI के राष्ट्रीय अध्यक्ष विनोद जाखड़ ने दिल्ली हाई कोर्ट में एक जनहित याचिका (PIL) दायर की है। इस याचिका में मांग की गई है कि आम जनता पर हुए इन हमलों की निष्पक्ष, स्वतंत्र और समयबद्ध जांच कराई जाए।
अधिवक्ता विमल त्यागी ने अदालत के सामने इस मामले की गंभीरता को रखते हुए तत्काल सुनवाई की अपील की। मुख्य न्यायाधीश नितिन वासुदेव साम्ब्रे की अध्यक्षता वाली बेंच ने इस पर कहा कि सुप्रीम कोर्ट पहले से ही इस मामले को देख रहा है और केंद्र सरकार से हलफनामा मांगा गया है। फिलहाल, हाई कोर्ट ने इस याचिका पर सुनवाई के लिए कल की तारीख तय की है।
साक्ष्यों के आधार पर SIT जांच की मांग
याचिका में आरोप लगाया गया है कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग कर रहे प्रदर्शनकारियों और वहां से गुजरने वाले आम राहगीरों को सादे कपड़ों में आए अज्ञात लोगों ने घेरकर पीटा। यह घटनाएं दोपहर करीब 2 बजे कनॉट प्लेस के इनर और आउटर सर्कल, इंदिरा चौक, खादी ग्रामोद्योग भवन और फुटपाथों पर हुईं।
विनोद जाखड़ ने अपनी याचिका में सार्वजनिक डोमेन में मौजूद नौ वीडियो रिकॉर्डिंग्स का हवाला दिया है। इन वीडियो में दावा किया गया है कि लोगों को धक्का दिया गया, लातें और घूंसे मारे गए और कुछ को जमीन पर गिराकर पीटा गया। एक वीडियो में एक व्यक्ति को गर्दन से पकड़े हुए और दूसरे में एक महिला पत्रकार को निशाना बनाते हुए दिखाया गया है, जब वह इन घटनाओं की रिकॉर्डिंग कर रही थी।
सबसे गंभीर सवाल पुलिस की भूमिका पर उठाए गए हैं। याचिका के अनुसार, वीडियो में हमलावरों के पास ही वर्दीधारी पुलिसकर्मी और बैरिकेड्स नजर आ रहे हैं। एक फुटेज में तो एक कथित हमलावर को पुलिस अधिकारी के साथ चलते हुए और दो पुलिसकर्मियों के बीच खड़े देखा गया है। इसी वजह से NSUI ने मांग की है कि जांच स्थानीय पुलिस के बजाय एक स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) द्वारा की जाए, जिसका नेतृत्व डीसीपी रैंक के अधिकारी करें और निगरानी जॉइंट सीपी स्तर के अधिकारी करें।
याचिका में कोर्ट से यह भी अपील की गई है कि 10 अक्टूबर को दोपहर 12 बजे से शाम 6 बजे के बीच कनॉट प्लेस, इंदिरा चौक, जनपथ, जंतर मंतर रोड और राजीव चौक व पटेल चौक जैसे मेट्रो स्टेशनों के CCTV फुटेज को तुरंत सुरक्षित किया जाए ताकि सबूत नष्ट न हों।