उत्तर भारत और पाकिस्तान में स्मॉग का कहर, दिल्ली-लाहौर की हवा हुई जहरीली
दिल्ली और लाहौर में AQI खतरनाक स्तर पर पहुंचा। सरकार ने GRAP लागू किया और वर्क फ्रॉम होम के निर्देश दिए।

सर्दियों की दस्तक के साथ ही उत्तर भारत और पाकिस्तान के मैदानी इलाकों में जहरीले स्मॉग ने अपना डेरा जमा लिया है। दिल्ली और लाहौर जैसे बड़े शहरों में हवा की गुणवत्ता (AQI) खतरनाक स्तर पर पहुंच गई है, जिससे आम लोगों का सांस लेना दूभर हो गया है। 4 नवंबर को दिल्ली में औसत AQI 379 दर्ज किया गया, जबकि कुछ इलाकों में यह आंकड़ा 605 तक जा पहुंचा, जो स्वास्थ्य के लिए बेहद चिंताजनक है।
प्रदूषण से निपटने के लिए सरकार ने कसी कमर
हालात बिगड़ते देख दिल्ली सरकार ने ग्रैडेड रिस्पांस एक्शन प्लान (GRAP) को सक्रिय कर दिया है। इसके तहत धूल उड़ाने वाले निर्माण और तोड़फोड़ कार्यों पर पूरी तरह रोक लगा दी गई है। गुरुग्राम में भी 5 नवंबर से 20 नवंबर तक निर्माण कार्यों पर कड़े प्रतिबंध लागू रहेंगे। प्रशासन ने डीजल जनरेटर के इस्तेमाल और ढाबों या रेस्टोरेंट में कोयले व लकड़ी के उपयोग पर पाबंदी लगा दी है। साथ ही, बॉर्डर पर वाहनों की चेकिंग तेज कर दी गई है और सरकारी व निजी दफ्तरों को 50% वर्क-फ्रॉम-होम लागू करने के निर्देश दिए गए हैं।
सीमा पार पाकिस्तान के लाहौर में भी स्थिति गंभीर है। हालांकि आधिकारिक तौर पर AQI 180 बताया गया, लेकिन स्थानीय मॉनिटरिंग स्टेशनों पर यह उससे कहीं ज्यादा दर्ज किया गया। वहां की सरकार ने 'चमकता लाहौर' अभियान शुरू किया है और पर्यावरण नियमों का उल्लंघन करने वाली ईंट भट्ठों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जा रही है।
आने वाली 8 नवंबर को दिवाली है, जिसे लेकर प्रशासन काफी चिंतित है। डर यह है कि पटाखों के धुएं से हवा और ज्यादा जहरीली हो जाएगी। इसी वजह से सुप्रीम कोर्ट ने केवल 'ग्रीन पटाखों' के सीमित उपयोग की अनुमति दी है।
विशेषज्ञों का मानना है कि ठंडी और घनी हवा प्रदूषकों को जमीन के करीब रोक लेती है, जिससे स्मॉग बनता है। इसके अलावा वाहनों का धुआं, औद्योगिक गतिविधियां, निर्माण कार्य की धूल और पराली जलाना इस संकट के मुख्य कारण हैं। डॉक्टरों ने लोगों को सलाह दी है कि वे बाहर निकलते समय मास्क का उपयोग करें और बाहरी गतिविधियों को कम से कम रखें।