नोएडा और ग्रेटर नोएडा के वाहनों की दिल्ली एंट्री पर रोक, 1 नवंबर से लागू होंगे कड़े नियम

1 नवंबर से नोएडा और ग्रेटर नोएडा के नॉन-BS-6 वाहनों की दिल्ली एंट्री पर पाबंदी लगेगी। जानें किन गाड़ियों पर लगेगा जुर्माना।

Kittu Kumari28 October 20262 min read0 viewsNCR
नोएडा और ग्रेटर नोएडा के वाहनों की दिल्ली एंट्री पर रोक, 1 नवंबर से लागू होंगे कड़े नियम

अगर आप नोएडा या ग्रेटर नोएडा से अपनी गाड़ी लेकर दिल्ली जाते हैं, तो यह खबर आपके लिए बेहद जरूरी है। सर्दियों में बढ़ते प्रदूषण को रोकने के लिए दिल्ली में एक बड़ा एक्शन प्लान तैयार किया गया है, जिसके तहत 1 नवंबर से नोएडा और ग्रेटर नोएडा के हजारों वाहनों की दिल्ली में एंट्री पर पाबंदी लगा दी जाएगी। यह प्रतिबंध 31 जनवरी तक प्रभावी रहेगा, जिससे रोजाना सफर करने वाले लाखों लोगों की मुश्किलें बढ़ सकती हैं।

कमीशन फॉर एयर क्वालिटी मैनेजमेंट (CAQM) के निर्देशों के मुताबिक, दिल्ली के बाहर रजिस्टर्ड कोई भी नॉन-BS-6 वाहन अब राजधानी की सीमा में प्रवेश नहीं कर पाएगा। इसमें दोपहिया, चार पहिया, टैक्सियां और कमर्शियल गुड्स करियर सभी शामिल हैं। अनुमान है कि अकेले गौतम बुद्ध नगर के करीब 3.5 लाख वाहन इस दायरे में आएंगे, जिनमें BS-4 गाड़ियां और पुरानी (End-of-Life) गाड़ियां शामिल हैं। पूरे NCR क्षेत्र की बात करें तो गुरुग्राम, फरीदाबाद, गाजियाबाद और नोएडा को मिलाकर करीब 10 लाख से ज्यादा गाड़ियां प्रभावित हो सकती हैं।

किन्हें मिलेगी छूट और क्या होगा जुर्माना?

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राहत की बात यह है कि इलेक्ट्रिक (EV) और CNG वाहनों को इस प्रतिबंध से छूट दी गई है। साथ ही एम्बुलेंस, फायर टेंडर और अन्य आवश्यक सेवाओं वाली गाड़ियों को भी आने की अनुमति होगी। दिल्ली में रजिस्टर्ड BS-6 गाड़ियां भी बेरोक चल सकेंगी।

प्रशासन इस बार नियमों को लेकर बेहद सख्त है। बॉर्डर पर करीब 300 परिवहन विभाग के कर्मचारी तैनात रहेंगे और निगरानी के लिए AI-पावर्ड कैमरों और ऑटोमेटेड नंबर प्लेट रिकग्निशन (ANPR) सिस्टम का इस्तेमाल किया जाएगा। अगर कोई वाहन बिना वैध PUC सर्टिफिकेट के पाया गया, तो 10,000 रुपये का जुर्माना लगेगा। वहीं, नॉन-BS-6 कमर्शियल वाहनों की एंट्री पर 20,000 रुपये तक का भारी जुर्माना लगाया जा सकता है। उत्तर प्रदेश के भीतर नॉन-BS-6 वाहन चलाने पर भी 5,000 रुपये जुर्माने का प्रावधान है।

इस फैसले के बाद नोएडा के नौकरीपेशा लोगों और व्यापारियों में चिंता बढ़ गई है। लोगों का कहना है कि इससे उनके दैनिक सफर और खर्चों पर बुरा असर पड़ेगा। यात्रियों ने प्रशासन से मांग की है कि इस समस्या के समाधान के लिए शटल सर्विस या कारपूलिंग के बेहतर विकल्प मुहैया कराए जाएं।

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