नोएडा और ग्रेटर नोएडा में प्रदूषण पर सख्ती, हवा की निगरानी के लिए लगेंगे नए स्टेशन

दिल्ली-NCR में बिगड़ती हवा के बीच नोएडा और ग्रेटर नोएडा में नए मॉनिटरिंग स्टेशन लगाए जा रहे हैं और GRAP-1 लागू किया गया है।

Kittu Kumari28 October 20262 min read0 viewsNCR
नोएडा और ग्रेटर नोएडा में प्रदूषण पर सख्ती, हवा की निगरानी के लिए लगेंगे नए स्टेशन

दिल्ली-NCR में हवा की क्वालिटी लगातार बिगड़ रही है और नोएडा समेत आसपास के इलाकों में प्रदूषण का स्तर खतरनाक स्तर तक पहुंच गया है। आने वाले छह दिनों में स्थिति और भी गंभीर होने की आशंका है, जिसे देखते हुए प्रशासन अब अलर्ट मोड पर है। दिल्ली और नोएडा के कई इलाकों में AQI गंभीर श्रेणी में पहुंच चुका है, जिसके बाद अब प्रदूषण पर लगाम लगाने के लिए निगरानी तंत्र को और मजबूत किया जा रहा है।

ताजा आंकड़ों के मुताबिक, दिल्ली का AQI 225 दर्ज किया गया, जबकि नोएडा के सेक्टर 62 में यह 267 और कुछ अन्य क्षेत्रों में 351 तक पहुंच गया है। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए दिल्ली-NCR में ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान (GRAP) के पहले चरण (Stage I) को लागू कर दिया गया है। इसके तहत निर्माण कार्यों पर सख्ती, धूल कम करने के उपाय और व्यावसायिक भोजनालयों में कोयले व लकड़ी के इस्तेमाल पर पूरी तरह पाबंदी लगा दी गई है। इसके अलावा, प्रदूषण फैलाने वाले उद्योगों को 30 नवंबर तक पैन-टिल्ट-ज़ूम कैमरे लगाने के निर्देश दिए गए हैं।

ग्रेटर नोएडा में बढ़ेंगे मॉनिटरिंग स्टेशन

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प्रदूषण की सटीक जानकारी और डेटा कलेक्शन के लिए ग्रेटर नोएडा अथॉरिटी अब छह नए 'कंटीन्यूअस एम्बिएंट एयर क्वालिटी मॉनिटरिंग स्टेशन्स' (CAAQMS) लगा रही है। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारी रितेश तिवारी के अनुसार, इन स्टेशनों को हर पांच से छह किलोमीटर की दूरी पर लगाया जा रहा है ताकि पूरे क्षेत्र की सटीक निगरानी हो सके।

  • दादरी और दानकौर में दो स्टेशन लगभग तैयार हैं और जल्द ही शुरू होंगे।
  • बाकी चार स्टेशनों पर काम जारी है, जिससे ग्रेटर नोएडा में कुल स्टेशनों की संख्या आठ हो जाएगी।
  • नवंबर के पहले और दूसरे हफ्ते तक इन स्टेशनों से डेटा मिलना शुरू हो जाएगा।

प्रशासन ने केवल निगरानी ही नहीं, बल्कि जमीनी स्तर पर सफाई के इंतजाम भी किए हैं। शहर के 21 जोन में 224 एंटी-स्मॉग गन, 107 वॉटर टैंकर और 11 मैकेनिकल स्वीपिंग मशीनें तैनात की गई हैं, ताकि हवा में उड़ने वाली धूल और प्रदूषण को कम किया जा सके।

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