नोएडा: अर्बन कंपनी के गिग वर्कर्स का प्रदर्शन 6 महीने बाद भी बेअसर, बुनियादी सुविधाओं की कमी से परेशान

नोएडा के सेक्टर 60 में अर्बन कंपनी के गिग वर्कर्स ने अपनी मांगों को लेकर करीब छह महीने पहले जोरदार विरोध प्रदर्शन किया था, लेकिन जमीनी हकीकत आज भी काफी चुनौतीपूर्ण है। सोनाक्षी, नेहा देवी और पिंकी देवी जैसे कई वर्कर्स का कहना है कि ट्रेनिंग सेंटर के बाहर की गई उनकी लड़ाई का असर बहुत कम हुआ है। हालांकि कंपनी ने कुछ बदलाव किए हैं, लेकिन बुनियादी सुविधाओं का अभाव अब भी इन वर्कर्स के लिए बड़ी मुसीबत बना हुआ है।
वर्कर्स की मुख्य मांगें आठ घंटे का तय कार्य समय, साप्ताहिक छुट्टी और पीने के पानी व शौचालय जैसी बुनियादी सुविधाओं तक पहुंच थी। अक्टूबर 2026 तक की समीक्षा बताती है कि अर्बन कंपनी ने महीने में चार दिन की छुट्टी, मेडिकल इंश्योरेंस और बुकिंग के बीच यात्रा की दूरी कम करने जैसे कदम तो उठाए हैं, लेकिन सबसे जरूरी मुद्दे अब भी अनसुलझे हैं।
महिलाओं के लिए बुनियादी सुविधाओं का भारी अभाव
सबसे ज्यादा परेशानी महिला गिग वर्कर्स को हो रही है। उनकी शिकायत है कि उन्हें सार्वजनिक शौचालयों और साफ पीने के पानी की सुविधा नहीं मिल रही है, साथ ही उनके पास आराम करने के लिए कोई सुरक्षित जगह नहीं है। इसके अलावा, तय वर्किंग ऑवर्स की मांग को पूरी तरह नजरअंदाज कर दिया गया है, जिससे उनका शेड्यूल अनिश्चित बना रहता है। हालात इतने खराब हैं कि कई वर्कर्स ने इस पेशे को पूरी तरह छोड़ने का फैसला कर लिया है।
इस पूरे मामले पर जब इंडियन एक्सप्रेस ने अर्बन कंपनी से सवाल पूछे, तो कंपनी की ओर से कोई जवाब नहीं आया। गौरतलब है कि नोएडा में केवल अर्बन कंपनी ही नहीं, बल्कि जोमैटो, स्विगी, जेप्टो और ब्लिंकिट के डिलीवरी राइडर्स और आशा वर्कर्स भी बेहतर अधिकारों के लिए संघर्ष कर रहे हैं।
दूसरी ओर, नोएडा अथॉरिटी ने अप्रैल में सार्वजनिक शौचालयों के बंद होने पर टेंडर प्रक्रिया में देरी का हवाला दिया था और दो हफ्ते में उन्हें खोलने का वादा किया था। वहीं, उत्तर प्रदेश सरकार ने अप्रैल 2026 में अकुशल श्रमिकों के लिए न्यूनतम वेतन ₹11,313 से बढ़ाकर ₹13,690 किया था।
लेबर राइट्स की इस लड़ाई में CaRWAN और IFAT जैसे संगठन सक्रिय हैं, जबकि AAP सांसद राघव चड्ढा ने भी डिलीवरी राइडर्स के संघर्षों की ओर ध्यान आकर्षित किया है।