नोएडा एक्सटेंशन: 130 मीटर रोड पर कटी तारबंदी, आवारा पशुओं से बढ़ गया हादसों का खतरा

नोएडा एक्सटेंशन की 130 मीटर रोड पर कटी हुई तारबंदी से आवारा पशुओं का खतरा बढ़ा, जिससे गंभीर सड़क हादसों की आशंका है।

Kittu Kumari30 October 20262 min read0 viewsNCR
नोएडा एक्सटेंशन: 130 मीटर रोड पर कटी तारबंदी, आवारा पशुओं से बढ़ गया हादसों का खतरा

नोएडा एक्सटेंशन की 130 मीटर रोड पर सफर करने वाले लोगों के लिए एक नई मुसीबत खड़ी हो गई है। संपूर्णम सोसाइटी के ठीक सामने लगी कटीली तारबंदी (barbed wire fencing) को जानबूझकर काट दिया गया है। इस सुरक्षा चूक ने स्थानीय निवासियों और राहगीरों के बीच डर पैदा कर दिया है, क्योंकि अब आवारा पशु आसानी से इस हाई-स्पीड रोड पर आ सकते हैं, जिससे किसी भी समय बड़ा हादसा हो सकता है।

यह सड़क क्षेत्र के बुनियादी ढांचे और ट्रैफिक मैनेजमेंट के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण है। यहाँ गाड़ियां काफी तेज रफ्तार से चलती हैं, ऐसे में सड़क पर अचानक किसी जानवर का आना जानलेवा साबित हो सकता है। गौरतलब है कि इस इलाके में पहले भी आवारा पशुओं की वजह से दर्दनाक हादसे हुए हैं। अक्टूबर 2023 में ग्रेटर नोएडा NH-91 पर एक motorcyclist की मौत हो गई थी, जब उसकी टक्कर एक आवारा पशु से हुई और उसके बाद वह एक ट्रक की चपेट में आ गया था।

इलाके में विकास के बावजूद बुनियादी सुरक्षा की चुनौती

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एक तरफ जहाँ प्रशासन इस क्षेत्र को आधुनिक बनाने में जुटा है, वहीं दूसरी तरफ ऐसी लापरवाही सुरक्षा पर सवाल खड़े करती है। इस रोड पर विकास के कई काम हुए हैं, जैसे:

  • जून 2026 में तिलपता और मकोड़ा राउंडअबाउट के बीच एक फ्लाईओवर शुरू किया गया ताकि ग्रेटर नोएडा वेस्ट और ईस्ट के बीच सफर आसान हो सके।
  • अक्टूबर 2026 में धूल प्रदूषण को कम करने और हरियाली बढ़ाने के लिए सड़क किनारे ग्रास ग्रिड लगाए गए।
  • जुलाई 2025 में ग्रेटर नोएडा अथॉरिटी ने इस सड़क को यमुना अथॉरिटी की 120 मीटर रोड से जोड़ने का प्रस्ताव दिया था ताकि आने वाले नोएडा एयरपोर्ट तक पहुंच आसान हो सके।

यह समस्या केवल नोएडा तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे NCR में आवारा पशुओं का आतंक बना हुआ है। हाल ही में गुरुग्राम में भी नगर निगम ने एजेंसियों को कड़ी चेतावनी दी थी क्योंकि वहां आवारा पशुओं के कारण लगातार जानलेवा सड़क हादसे हो रहे थे।

संपूर्णम सोसाइटी के निवासी पहले भी बुनियादी सुविधाओं, बिजली-पानी की किल्लत और मेंटेनेंस जैसे मुद्दों को लेकर विरोध प्रदर्शन कर चुके हैं। अब तारबंदी टूटने से पैदा हुए इस खतरे ने एक बार फिर प्रबंधन और प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

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