नोएडा प्राधिकरण ने दिल्ली-एनसीआर को जेवर में नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट से सीधे जोड़ने के लिए एक नए 6-लेन एलिवेटेड एक्सप्रेसवे के अंतिम संरेखण को आधिकारिक तौर पर मंजूरी दे दी है। इस परियोजना की अनुमानित लागत 4,000 करोड़ रुपये है और इसका उद्देश्य दिल्ली और हवाई अड्डे के बीच यात्रा के समय को घटाकर 60 से 70 मिनट करना है।
यह लगभग 50 किलोमीटर लंबा गलियारा 22 गांवों से होकर गुजरेगा।
नोएडा क्षेत्र के भीतर यह एक्सप्रेसवे लगभग 27 किलोमीटर में फैला होगा और सेक्टर-44, सेक्टर-99, सेक्टर-101, सेक्टर-109 के साथ-साथ वाजिदपुर, झट्टा, बडोली बांगर, कोंडली, गढ़ी और मोमनाथ जैसे गांवों से गुजरेगा। इस रूट में ग्रेटर नोएडा के तीन अन्य गांव भी शामिल हैं। निर्माण में सुविधा के लिए नोएडा प्राधिकरण ने भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण को मुफ्त जमीन देने का संकल्प लिया है।
मुख्य गलियारे में 6 लेन होंगी, लेकिन
इंजीनियरों ने अधिक यातायात को संभालने के लिए प्रवेश बिंदुओं को 8 लेन तक बढ़ाने की योजना बनाई है। उत्तर प्रदेश सिंचाई विभाग की बाढ़ के जोखिम संबंधी आपत्तियों के बाद संरेखण में संशोधन किया गया है जिसके परिणामस्वरूप नोएडा की ओर 5 मीटर का बदलाव हुआ है। एनएचएआई वर्तमान में विस्तृत परियोजना रिपोर्ट तैयार कर रहा है और एक्सप्रेसवे के निर्माण व रखरखाव की देखरेख करेगा, जो दिल्ली में अक्षरधाम मंदिर के पास शुरू होने के लिए डिजाइन किया गया है।
नोएडा प्राधिकरण के सीईओ कृष्णा करुणेश ने कहा कि
हवाई अड्डे के लिए सड़क कनेक्टिविटी को प्राथमिकता देना क्षेत्रीय विकास के लिए आवश्यक है। यह बुनियादी ढांचा परियोजना गाजियाबाद को हवाई अड्डे से जोड़ने वाले 72.44 किलोमीटर लंबे प्रस्तावित रैपिड रेल-मेट्रो हाइब्रिड कॉरिडोर और फरीदाबाद तथा गुरुग्राम को हवाई अड्डे से जोड़ने के लिए डिज़ाइन किए गए 19,390 करोड़ रुपये के 64 किलोमीटर लंबे नमो भारत कॉरिडोर जैसी अन्य परिवहन पहलों की पूरक है।