नोएडा एयरपोर्ट का फर्जी वीडियो वायरल, फेसबुक पेज 'सच बोलो' के खिलाफ केस दर्ज

Kittu Kumari16 August 20262 min read60 viewsNCR
नोएडा एयरपोर्ट का फर्जी वीडियो वायरल, फेसबुक पेज 'सच बोलो' के खिलाफ केस दर्ज

नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर जलभराव का भ्रामक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल करने के मामले में जेवर पुलिस ने फेसबुक पेज ‘सच बोलो’ के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज की है। पुलिस की प्रारंभिक जांच में वायरल वीडियो एआई जेनरेटेड पाया गया है। एयरपोर्ट सुरक्षा शिफ्ट इंचार्ज की शिकायत पर प्राथमिकी दर्ज कर पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है।

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  • फेसबुक पेज ‘सच बोलो’ पर नोएडा एयरपोर्ट का वीडियो अपलोड किया गया था।
  • वीडियो में एयरपोर्ट पर जलभराव दिखाया गया, जिसे प्रबंधन ने फर्जी बताया।
  • प्राथमिकी दर्ज कर पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है।

जेवर थाने में दर्ज हुई प्राथमिकी

थाना जेवर के प्रभारी निरीक्षक अजय कुमार सिंह ने बताया कि एयरपोर्ट के सुरक्षा शिफ्ट इंचार्ज मयंक कुमार की ओर से पुलिस को शिकायत दी गई थी। शिकायत में बताया गया कि बीते शुक्रवार को फेसबुक पेज ‘सच बोलो’ पर नोएडा एयरपोर्ट से संबंधित एक वीडियो अपलोड किया गया। वीडियो में एयरपोर्ट पर जलभराव दिखाया गया, जबकि एयरपोर्ट प्रबंधन ने इसे पूरी तरह फर्जी बताया है। पुलिस के मुताबिक, वीडियो के माध्यम से एयरपोर्ट की गलत छवि पेश करने और लोगों के बीच जलभराव को लेकर भ्रम फैलाने की कोशिश की गई। इससे आम लोगों में भ्रम की स्थिति उत्पन्न होने और उनके गुमराह होने की आशंका जताई गई है।

एआई जेनरेटेड निकला वीडियो

शिकायत मिलने के बाद जेवर पुलिस ने तत्काल रिपोर्ट दर्ज कर वीडियो और संबंधित फेसबुक पेज की जांच शुरू कर दी। प्रारंभिक जांच में वीडियो के एआई जेनरेटेड होने की बात सामने आई है। अब पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि वीडियो किसने तैयार कर सोशल मीडिया पर अपलोड किया और इसके पीछे उसकी क्या मंशा थी। पुलिस के अनुसार, अभी तक फेसबुक पेज संचालक के बारे में कोई ठोस जानकारी हाथ नहीं लगी है। उसके संबंध में जानकारी जुटाने के लिए जांच-पड़ताल जारी है। एयरपोर्ट प्रबंधन की ओर से भी सोशल मीडिया पर इस तरह की भ्रामक सामग्री की निगरानी की जा रही है।

मेटा से अकाउंट निरस्त कराने के लिए होगा पत्राचार

जेवर थाना प्रभारी ने बताया कि संबंधित फेसबुक अकाउंट को निरस्त कराने के लिए मेटा से भी पत्राचार किया जाएगा। पुलिस का उद्देश्य ऐसी भ्रामक सामग्री को दोबारा प्रसारित होने से रोकना है। फिलहाल पुलिस वीडियो के स्रोत, पेज संचालक और उसे अपलोड करने के पीछे की मंशा की जांच कर रही है।

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