नोएडा की हवा हुई जहरीली, कई सेक्टरों में AQI 300 के पार; निर्माण कार्यों पर लगी रोक
नोएडा के कई सेक्टरों में AQI 300 के पार पहुंचा। निर्माण कार्यों पर रोक और बाहरी वाहनों के लिए कड़े नियम लागू किए गए हैं।

नोएडा के निवासियों के लिए सांस लेना अब एक चुनौती बन गया है। शहर के कई इलाकों में नोएडा एयर क्वालिटी बेहद खतरनाक स्तर पर पहुंच गई है, जिससे पूरा शहर स्मॉग की चादर में लिपटा नजर आ रहा है। सेंट्रल पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड (CPCB) के ताजा आंकड़ों ने इस संकट की गंभीरता को उजागर किया है, जिसमें हवा की गुणवत्ता को 'बेहद खराब' (Very Poor) श्रेणी में रखा गया है।
प्रदूषण का सबसे बुरा असर सेक्टर-62 में देखा गया, जहां AQI 384 तक पहुंच गया। इसके अलावा, नॉलेज पार्क-5 में 349, सेक्टर-39 में 345 और सेक्टर-150 में 330 का स्तर दर्ज किया गया है। वहीं, शिव नादर यूनिवर्सिटी के पास भी AQI 266 रहा। विशेषज्ञों का मानना है कि गिरता तापमान, धीमी हवाएं, त्योहारों के बाद बढ़ा प्रदूषण और पड़ोसी राज्यों में पराली जलाने जैसी वजहों ने मिलकर इस स्थिति को और बदतर बना दिया है, जिससे प्रदूषक तत्व हवा में ही फंस गए हैं।
GRAP के तहत कड़े प्रतिबंध लागू, बाहरी वाहनों की एंट्री बंद
बढ़ते प्रदूषण को देखते हुए प्रशासन ने सख्त कदम उठाए हैं। 1 नवंबर 2026 से 31 जनवरी 2027 तक के लिए ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान (GRAP) लागू कर दिया गया है। इसके तहत दिल्ली-एनसीआर में प्रवेश करने वाले बाहरी वाहनों के लिए कड़े नियम बनाए गए हैं। अब केवल CNG, इलेक्ट्रिक या BS-VI मानकों को पूरा करने वाले वाहन ही प्रवेश कर सकेंगे; अन्य गैर-अनुपालन वाहनों पर पूरी तरह पाबंदी लगा दी गई है।
इतना ही नहीं, धूल और पार्टिकुलेट मैटर को कम करने के लिए केंद्र सरकार ने एक बड़ा फैसला लिया है। 5 नवंबर से 20 नवंबर 2026 तक पूरे एनसीआर क्षेत्र में किसी भी तरह के निर्माण और तोड़फोड़ (Construction and Demolition) के काम को पूरी तरह से निलंबित कर दिया गया है।
स्वास्थ्य विभाग ने आम जनता, खासकर बच्चों, बुजुर्गों और दिल या फेफड़ों की बीमारी से जूझ रहे लोगों के लिए एडवाइजरी जारी की है। उन्हें सलाह दी गई है कि वे बाहर जाने से बचें और यदि जाना जरूरी हो, तो मास्क का अनिवार्य रूप से उपयोग करें ताकि सांस संबंधी गंभीर बीमारियों से बचा जा सके।