No UPI Day: नए MDR शुल्क के खिलाफ व्यापारियों का हल्लाबोल, देश भर में दिखा मिला-जुला असर

देशभर के व्यापारियों ने 2 अक्टूबर 2026 को 'नो यूपीआई डे' मनाकर सरकार के नए नियमों के खिलाफ अपना विरोध दर्ज कराया। यह विरोध प्रदर्शन यूपीआई ट्रांजेक्शन पर लागू होने वाले मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) के खिलाफ था। व्यापारियों की मांग है कि इस नए शुल्क को तुरंत वापस लिया जाए, क्योंकि इससे उनके कारोबार पर सीधा असर पड़ेगा।
दरअसल, 15 अक्टूबर 2026 से एक नया ढांचा लागू होने जा रहा है, जिसके तहत 2,000 रुपये से अधिक के P2M (पर्सन टू मर्चेंट) यूपीआई ट्रांजेक्शन पर 0.4% MDR लगाया जाएगा। हालांकि, 75,000 रुपये या उससे अधिक के लेनदेन के लिए इस शुल्क की अधिकतम सीमा 300 रुपये तय की गई है। राहत की बात यह है कि P2P (पर्सन टू पर्सन) ट्रांसफर और 2,000 रुपये से कम के भुगतान पर कोई शुल्क नहीं लगेगा। साथ ही, वे छोटे व्यापारी जो क्यूआर कोड के जरिए महीने में 1 लाख रुपये से कम का लेनदेन करते हैं, उन्हें भी इस दायरे से बाहर रखा गया है।
अलग-अलग शहरों में दिखा अलग प्रभाव
इस विरोध प्रदर्शन का असर पूरे देश में एक जैसा नहीं रहा। दिल्ली में यह प्रभाव मिला-जुला रहा, जहां कई दुकानदारों ने अभी भी यूपीआई सेवाओं का इस्तेमाल जारी रखा। वहीं, पुणे में इसका बड़ा असर देखा गया, जहां करीब 600 थोक व्यापारियों और 10,000 से ज्यादा रिटेलर्स ने हिस्सा लिया, जिससे कैश की कमी के कारण बिक्री में गिरावट आई। अहमदाबाद में भी स्थिति बंटी हुई थी; पारंपरिक बाजारों में व्यापारियों ने यूपीआई क्यूआर कोड ढक दिए थे, जबकि पश्चिमी इलाकों के रिटेल जोन में काम सामान्य रहा क्योंकि वहां ज्यादातर ट्रांजेक्शन 2,000 रुपये से कम के थे।
फेडरेशन ऑफ रिटेल ट्रेडर्स वेलफेयर एसोसिएशन (FRTWA) के मुताबिक, इस प्रदर्शन में हजारों व्यापारियों और लगभग 250 व्यापार संघों ने हिस्सा लिया। हालांकि, ऑल इंडिया मोबाइल रिटेलर्स एसोसिएशन (AIMRA) और ऑल इंडिया कंज्यूमर प्रोडक्ट्स डिस्ट्रीब्यूटर्स फेडरेशन (AICPDF) ने वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के साथ बैठक के बाद अपना विरोध वापस ले लिया। इसके बावजूद चैंबर ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री (CTI) और गुजरात ट्रेडर्स फेडरेशन जैसे संगठनों ने प्रदर्शन जारी रखा।
दूसरी ओर, पेट्रोल पंप एसोसिएशनों ने अभी यूपीआई पेमेंट लेना जारी रखा है और वे 15 अक्टूबर की समय सीमा से पहले सरकार से स्पष्टीकरण का इंतजार कर रहे हैं। इस पूरे मामले में अब सुप्रीम कोर्ट की एंट्री हुई है। कोर्ट ने केंद्र सरकार, आरबीआई, एनपीसीआई और यूपीआई एंड सर्विसेज स्टीयरिंग कमेटी से इस प्रस्तावित MDR के लिए कानूनी आधार और औचित्य पेश करने को कहा है। साथ ही, वित्त मंत्रालय ने बैंकों को सख्त निर्देश दिए हैं कि मर्चेंट इस शुल्क का बोझ ग्राहकों पर न डालें।