नितिन नबीन का विपक्ष पर बड़ा हमला, राहुल और केजरीवाल पर लगाया 'अर्बन नक्सल' होने का आरोप

Kittu Kumari10 October 20262 min read0 viewsNational
नितिन नबीन का विपक्ष पर बड़ा हमला, राहुल और केजरीवाल पर लगाया 'अर्बन नक्सल' होने का आरोप

भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन ने राजधानी दिल्ली में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान विपक्षी नेताओं पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कांग्रेस नेता राहुल गांधी और आम आदमी पार्टी के प्रमुख अरविंद केजरीवाल पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि उनकी मानसिकता 'अर्बन नक्सल' जैसी है। नबीन का दावा है कि ये नेता देश को अस्थिर करने की कोशिश कर रहे हैं, जबकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में पिछले 12 वर्षों में आतंकवाद और नक्सलवाद को खत्म करने के लिए अभूतपूर्व प्रगति हुई है।

नितिन नबीन ने अपनी बात आगे बढ़ाते हुए कहा कि ये समूह विदेशी ताकतों के इशारे पर काम कर रहे हैं और देश में तनाव पैदा करने की होड़ में लगे हुए हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि सरकार देश की शांति भंग करने की किसी भी कोशिश को बर्दाश्त नहीं करेगी और ऐसी गतिविधियों से निपटने के लिए सख्त कदम उठाए जाएंगे।

दिल्ली में भारी विरोध प्रदर्शन और पुलिस की कार्रवाई

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एक तरफ जहां राजनीतिक बयानबाजी तेज थी, वहीं दिल्ली की सड़कों पर माहौल काफी तनावपूर्ण रहा। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने विभिन्न छात्र संगठनों और वामपंथी समूहों के समर्थन से एक बड़ा प्रदर्शन किया। इस प्रदर्शन के जरिए मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और मतदाता सूची के विशेष गहन संशोधन (SIR) अभ्यास को वापस लेने की मांग की गई।

इस विरोध प्रदर्शन को रोकने के लिए दिल्ली पुलिस ने कड़े सुरक्षा इंतजाम किए थे। पुलिस ने प्रदर्शन को अनुमति नहीं दी थी, जिसके चलते दोपहर 2 बजे तक करीब 5,000 लोगों को हिरासत में लिया गया। CJP के संस्थापक अभिजीत दिपके, सौरव दास और आशुतोष रंका जैसे प्रमुख नेताओं को भी शहर पहुंचते ही हिरासत में ले लिया गया। भीड़ को नियंत्रित करने के लिए दिल्ली मेट्रो के कई स्टेशनों को बंद कर दिया गया और ट्रैफिक पर भारी पाबंदी लगाई गई।

इस पूरे विवाद पर राहुल गांधी ने आंदोलन का समर्थन करते हुए कहा कि मुख्य चुनाव आयुक्त का जाना लोकतंत्र की मरम्मत की शुरुआत होगी। हालांकि, नितिन नबीन ने इन तमाम विरोध प्रदर्शनों को चुनावी हार के बाद उपजी हताशा का परिणाम बताया। उन्होंने स्पष्ट किया कि देश के 140 करोड़ नागरिक संवैधानिक ढांचे को चुनौती देने या उच्च पदों पर बैठे व्यक्तियों के खिलाफ अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल बर्दाश्त नहीं करेंगे।

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