शहरों का शासन राज्य की राजधानियों से नहीं चलेगा, स्थानीय निकायों को मिले अधिकार: राजीव गौबा
नीति आयोग के सदस्य राजीव गौबा ने शहरी शासन में बड़े बदलाव और मेयरों को अधिक शक्ति देने की वकालत की है।

नीति आयोग के सदस्य राजीव गौबा ने भारत के शहरी शासन ढांचे में बड़े बदलाव की जरूरत पर जोर दिया है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि शहरों का संचालन राज्य की राजधानियों से नहीं किया जा सकता। उनके मुताबिक, देश की तेजी से बढ़ती शहरी आबादी की जरूरतों को पूरा करने के लिए गवर्नेंस, प्लानिंग और फाइनेंसिंग में बुनियादी सुधार लाना अनिवार्य है।
दूसरे नेशनल अर्बन कॉन्क्लेव के समापन सत्र को संबोधित करते हुए गौबा ने कहा कि आर्थिक विकास को गति देने के लिए शहर की सरकारों को अधिक वित्तीय स्वतंत्रता और शक्तियां मिलनी चाहिए। उन्होंने सुझाव दिया कि मेयर का चुनाव सीधे जनता द्वारा किया जाना चाहिए और उनका कार्यकाल पांच साल का हो। साथ ही, उन्होंने 'मेयर-इन-काउंसिल' सिस्टम और समय पर नगर निकाय चुनाव कराने की बात कही ताकि शहरी प्रशासन को मजबूती मिल सके।
शहरी बुनियादी ढांचे और वित्तीय सुधारों पर जोर
राजीव गौबा ने राज्यों से आग्रह किया कि वे 74वें संवैधानिक संशोधन के तहत आने वाले सभी 18 कार्यों को शहरी स्थानीय निकायों को सौंपें। इसमें शहरी नियोजन, जल आपूर्ति, फायर सर्विस और ट्रैफिक मैनेजमेंट जैसे महत्वपूर्ण कार्य शामिल हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि समय रहते बदलाव नहीं किए गए, तो भविष्य की चुनौतियों से निपटना मुश्किल होगा, क्योंकि अनुमान है कि 2050 तक भारत की शहरी आबादी 50 करोड़ से बढ़कर 85 करोड़ हो जाएगी।
वित्तीय मोर्चे पर बात करते हुए उन्होंने नगर निकायों के कम राजस्व पर चिंता जताई। उन्होंने प्रॉपर्टी टैक्स की वसूली में सुधार, यूजर-चार्ज रिकवरी को बेहतर बनाने और राज्यों द्वारा स्थानीय निकायों को अधिक फंड ट्रांसफर करने की आवश्यकता बताई।
इसके अलावा, उन्होंने आवास की समस्या को हल करने के लिए बिल्डिंग रेगुलेशन और लैंड-यूज़ पॉलिसी में बदलाव की वकालत की। उन्होंने फ्लोर एरिया रेशियो (FAR) में ढील देने, मिश्रित उपयोग वाले विकास को बढ़ावा देने और ट्रांजिट हब के आसपास निर्माण को प्रोत्साहित करने का सुझाव दिया। साथ ही, प्रवासी मजदूरों, छात्रों और युवाओं के लिए किफायती रेंटल हाउसिंग उपलब्ध कराने के लिए राज्यों को 'मॉडल टेनेंसी एक्ट' अपनाने का आग्रह किया।
गौबा ने यह भी सुझाव दिया कि केंद्र सरकार शहरी विकास मिशनों के तहत मिलने वाली सहायता को इन सुधारों के कार्यान्वयन से जोड़े, ताकि 'विकसित भारत 2047' के विजन को साकार किया जा सके और शहरों को आर्थिक विकास के असली केंद्र बनाया जा सके।