जाली पासपोर्ट और वीजा रैकेट: दिल्ली कोर्ट ने नाइजीरियाई नागरिक को दी जमानत

दिल्ली की एक अदालत ने जाली पासपोर्ट और वीजा रैकेट में फंसे नाइजीरियाई नागरिक न्वाचुकवु बेंजामिन ओडिनाका को जमानत दे दी है। स्पेशल जज धीरज मोर ने 14 अक्टूबर, 2026 को यह आदेश जारी करते हुए आरोपी को 25,000 रुपये के पर्सनल बॉन्ड और दो स्थानीय जमानतदारों की शर्त पर रिहा करने का निर्देश दिया। हालांकि, कोर्ट ने सख्त हिदायत दी है कि आरोपी बिना अनुमति के भारत छोड़कर कहीं नहीं जा सकता।
बता दें कि ओडिनाका 14 सितंबर, 2025 को दिल्ली पुलिस द्वारा गिरफ्तार किया गया था और तब से वह करीब 13 महीनों से न्यायिक हिरासत में था। यह मामला तब सामने आया जब पुलिस ने दो अन्य अफ्रीकी नागरिकों को कोकीन के साथ पकड़ा था। पूछताछ के दौरान उन आरोपियों ने खुलासा किया कि उन्हें फर्जी ट्रैवल दस्तावेज ओडिनाका ने ही मुहैया कराए थे। जांच एजेंसियों का आरोप है कि आरोपी न केवल फर्जी वीजा का नेटवर्क चला रहा था, बल्कि वह ऑनलाइन स्कैम (धोखाधड़ी) में भी शामिल था।
कोर्ट ने जमानत देने के लिए क्या कहा?
अदालत ने जमानत देते समय कई महत्वपूर्ण बिंदुओं पर गौर किया। जज धीरज मोर ने पाया कि इस मामले की जांच पूरी हो चुकी है। कोर्ट ने यह भी नोट किया कि मामले के सभी गवाह या तो सरकारी अधिकारी हैं या विशेषज्ञ, इसलिए गवाहों को प्रभावित करने या सबूतों के साथ छेड़छाड़ की संभावना बहुत कम है।
एक और अहम बात यह रही कि आरोपी पर एनडीपीएस (NDPS) एक्ट के तहत कोई आरोप नहीं लगाया गया था। अदालत का मानना था कि चूंकि मुकदमे की सुनवाई में लंबा समय लग सकता है, इसलिए आरोपी को और अधिक समय तक जेल में रखना उचित नहीं होगा। वहीं, आरोपी के देश छोड़कर भागने की आशंका को दूर करने के लिए कोर्ट ने जमानत की कड़ी शर्तें लागू की हैं।