दिल्ली प्रदर्शन: हिरासत में लिए गए लोगों के लिए NHRC से बुनियादी सुविधाओं की मांग

दिल्ली में चल रहे आंदोलनों के बीच एक महत्वपूर्ण कानूनी कदम उठाया गया है। सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन के सदस्य और वकील वीरेंद्र वशिष्ठ ने राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) का दरवाजा खटखटाया है। उन्होंने मांग की है कि यदि प्रदर्शनों के कारण लोगों को हिरासत में लिया जाता है, तो उनके लिए भोजन, साफ पीने के पानी, स्वच्छता और चिकित्सा सहायता जैसे बुनियादी इंतजाम पहले से सुनिश्चित किए जाएं।
वकील वीरेंद्र वशिष्ठ ने 13 अक्टूबर को सौंपे गए अपने आवेदन में स्पष्ट किया कि यह एक निवारक (preventive) याचिका है। उन्होंने किसी विशेष घटना का जिक्र नहीं किया है, बल्कि यह सुनिश्चित करना चाहते हैं कि भविष्य में किसी भी व्यक्ति को हिरासत के दौरान बुनियादी जरूरतों से वंचित न किया जाए। उन्होंने संविधान के अनुच्छेद 21 का हवाला देते हुए कहा कि जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता का अधिकार हर नागरिक को है, और हिरासत में होने का मतलब यह नहीं है कि किसी व्यक्ति को मानवीय गरिमा और जीवित रहने के लिए जरूरी चीजों से दूर रखा जाए।
हिरासत केंद्रों के लिए लिखित प्रोटोकॉल की मांग
वशिष्ठ ने NHRC से आग्रह किया है कि वह पुलिस हिरासत केंद्रों और अन्य निर्धारित केंद्रों के लिए एक लिखित प्रोटोकॉल तैयार करने की सिफारिश करे। इस प्रस्तावित गाइडलाइन में निम्नलिखित मुख्य बिंदु शामिल हैं:
- निश्चित अंतराल पर पौष्टिक भोजन की उपलब्धता।
- साफ पीने के पानी की निरंतर आपूर्ति।
- विशेष आहार या चिकित्सा जरूरतों वाले लोगों के लिए अलग व्यवस्था।
- साफ-सुथरी स्वच्छता सुविधाएं और भोजन के भंडारण की उचित व्यवस्था।
- कमजोरी, डिहाइड्रेशन या बेहोशी की स्थिति में तुरंत चिकित्सा सहायता।
इसके अलावा, आवेदन में बच्चों, बुजुर्गों, गर्भवती महिलाओं और दिव्यांग व्यक्तियों के लिए विशेष देखभाल की मांग की गई है। जवाबदेही तय करने के लिए उन्होंने सुझाव दिया कि भोजन, पानी और चिकित्सा सहायता के वितरण का रिकॉर्ड रखा जाए और इसकी निगरानी के लिए जिम्मेदार अधिकारियों की नियुक्ति की जाए।
वकील ने अपने आवेदन में विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) और नेशनल एकेडमी ऑफ साइंसेज के संदर्भों का उपयोग करते हुए पोषण और हाइड्रेशन के महत्व को समझाया है। उन्होंने आयोग से अनुरोध किया है कि वह मानवाधिकार संरक्षण अधिनियम, 1993 के तहत इस मामले का संज्ञान ले और दिल्ली पुलिस कमिश्नर सहित संबंधित अधिकारियों से इस पर स्टेटस रिपोर्ट मांगे, ताकि किसी भी संभावित मानवाधिकार उल्लंघन को रोका जा सके।