कंगनहेड़ी गांव के तालाब से हटेगा अतिक्रमण, NGT ने दिए पुराने स्वरूप में बहाल करने के निर्देश
NGT ने दिल्ली के कंगनहेड़ी गांव में तालाब के अतिक्रमण को हटाने और उसे पुराने स्वरूप में बहाल करने के निर्देश दिए हैं।

दिल्ली के कंगनहेड़ी गांव में स्थित एक तालाब को बचाने के लिए नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) ने सख्त रुख अपनाया है। ट्रिब्यूनल ने संबंधित अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि तालाब की जमीन पर किए गए अवैध कब्जों को हटाया जाए और इस जल निकाय को उसके मूल आकार और स्वरूप में वापस लाया जाए। साथ ही, यह भी सुनिश्चित करने को कहा गया है कि भविष्य में इस क्षेत्र पर दोबारा अतिक्रमण न हो सके।
यह पूरा मामला सुरेश चंद द्वारा दायर एक आवेदन से जुड़ा है। उन्होंने ट्रिब्यूनल को बताया था कि खसरा नंबर 111 में स्थित लगभग 13 बीघा और 10 बिस्वा क्षेत्रफल वाले तालाब पर अतिक्रमण कर लिया गया है। मामले की गंभीरता को देखते हुए जस्टिस अरुण कुमार त्यागी और एक्सपर्ट मेंबर डॉ. ए. सेंथिल वेल की बेंच ने यह आदेश पारित किया है।
बाउंड्री वॉल की जगह बायो-फेंसिंग पर जोर
सुनवाई के दौरान एक दिलचस्प मोड़ तब आया जब तालाब की सुरक्षा के लिए दीवार बनाने की बात उठी। NGT ने स्थायी पक्की दीवार बनाने का विरोध किया। ट्रिब्यूनल का मानना था कि पक्की दीवार बनाने से बारिश का पानी और ऊपरी सतह से बहने वाला जल तालाब तक नहीं पहुंच पाएगा, जिससे जल स्तर प्रभावित होगा। इसके बजाय, कोर्ट ने अधिकारियों को 'बायो-फेंसिंग' (पेड़-पौधों और झाड़ियों की प्राकृतिक बाड़) लगाने की संभावना तलाशने को कहा है, ताकि पर्यावरण का संतुलन बना रहे।
इस प्रक्रिया में कुछ चुनौतियां भी आईं, क्योंकि शुरुआत में तालाब की उत्तरी और उत्तर-पूर्वी सीमाओं का नक्शा स्पष्ट नहीं था। इसके बाद दक्षिण-पश्चिम दिल्ली के जिला मजिस्ट्रेट और मटियाला तहसीलदार को व्यक्तिगत रूप से हस्तक्षेप करना पड़ा। तहसीलदार राकेश कुमार सिंह ने ट्रिब्यूनल के सामने मूल सीमांकन नक्शा पेश किया, जिसमें तालाब के क्षेत्र को नीले रंग से दर्शाया गया था। आवेदक ने भी इस नक्शे को सही माना, जिसके बाद कोर्ट ने अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई को हरी झंडी दे दी।
NGT ने साफ किया है कि यह पूरी कार्रवाई कानून के दायरे में और सुप्रीम कोर्ट व दिल्ली हाई कोर्ट के आदेशों के अधीन होनी चाहिए। अब प्रशासन को उन सभी हिस्सों को वापस तालाब में शामिल करना होगा, जो अतिक्रमण हटने के बाद खाली होंगे, ताकि यह जल स्रोत फिर से जीवित हो सके।