मुस्तफाबाद में 28 बीघा जल निकाय पर कब्जे का आरोप, NGT ने DDA को भेजा नोटिस

उत्तर-पूर्वी दिल्ली के मुस्तफाबाद गांव में एक जल निकाय (Water Body) पर अवैध कब्जे के गंभीर आरोपों ने अब कानूनी मोड़ ले लिया है। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) ने इस मामले में कड़ा रुख अपनाते हुए दिल्ली विकास प्राधिकरण (DDA) को औपचारिक नोटिस जारी किया है। यह पूरी कार्रवाई एक याचिका के बाद शुरू हुई है, जिसमें दावा किया गया है कि करीब 28 बीघा जमीन, जिसे जल निकाय के तौर पर चिन्हित किया गया था, उस पर अवैध रूप से अतिक्रमण कर लिया गया है।
ट्रिब्यूनल अब इस बात की गहन जांच कर रहा है कि आखिर इस जमीन की वर्तमान स्थिति क्या है और जल निकाय के संरक्षण में चूक कहां हुई। यह मामला ऐसे समय में सामने आया है जब NGT पूरी दिल्ली-NCR में जल निकायों के संरक्षण और उनके पुनरुद्धार (Restoration) को लेकर बेहद सख्त है।
दिल्ली के जल निकायों की चिंताजनक स्थिति
सिर्फ मुस्तफाबाद ही नहीं, बल्कि पूरी दिल्ली में जल निकायों की स्थिति काफी चिंताजनक नजर आ रही है। वेटलैंड अथॉरिटी ऑफ दिल्ली के आंकड़ों पर नजर डालें तो शहर में कुल 1,080 जल निकाय चिन्हित किए गए हैं, जिनमें से 135 पर अतिक्रमण हो चुका है और 196 पूरी तरह सूख चुके हैं।
इस पूरी व्यवस्था में DDA की भूमिका सबसे अहम है क्योंकि शहर के 856 जल निकायों का प्रबंधन इसी प्राधिकरण के पास है। DDA की अपनी रिपोर्ट के मुताबिक, उसके अधीन आने वाले 126 जल निकायों पर कब्जा हो चुका है, जबकि 181 जल निकाय सूख चुके हैं।
NGT ने पहले भी कई मौकों पर DDA के प्रबंधन पर सवाल उठाए हैं। ट्रिब्यूनल ने प्राधिकरण को बार-बार निर्देश दिए हैं कि वह इन जमीनों की भौतिक सीमा का निर्धारण (Physical Demarcation) करे और अतिक्रमणकारियों की विस्तृत सूची सौंपे। फिलहाल, NGT इस बात की निगरानी कर रहा है कि दिल्ली के प्राकृतिक जल संसाधनों को बचाने के लिए बनाए गए पुनरुद्धार प्लान जमीन पर कितने प्रभावी साबित हो रहे हैं।