मुस्तफाबाद में 28 बीघे जल निकाय पर कब्जे का आरोप, NGT ने DDA को भेजा नोटिस

उत्तर-पूर्वी दिल्ली के मुस्तफाबाद गांव में एक बड़े जल निकाय (जोहड़) पर अवैध कब्जे के मामले में नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) ने सख्त रुख अपनाया है। ट्रिब्यूनल ने इस गंभीर मुद्दे पर दिल्ली विकास प्राधिकरण (DDA) को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। यह पूरी कार्रवाई 'सेव इंडिया फाउंडेशन' द्वारा दायर एक याचिका के बाद शुरू हुई है, जिसमें आरोप लगाया गया है कि पर्यावरण नियमों की अनदेखी करते हुए इस महत्वपूर्ण जल स्रोत को अतिक्रमित किया गया है।
NGT की पीठ, जिसकी अध्यक्षता जस्टिस प्रकाश श्रीवास्तव और एक्सपर्ट मेंबर डॉ. अफरोज अहमद कर रहे हैं, ने माना कि यह मामला पर्यावरण मानकों के अनुपालन से जुड़ा एक बड़ा मुद्दा है। याचिकाकर्ता के अनुसार, यमुना विहार सब-डिवीजन के मुस्तफाबाद गांव के खसरा नंबर 368/1 पर स्थित यह जल निकाय लगभग 28 बीघे और 2 बिस्वा क्षेत्र में फैला हुआ है। सुनवाई के दौरान यह तथ्य सामने आया कि संयुक्त निरीक्षण के बाद इस जमीन को DDA को सौंपा गया था और DDA की अपनी सूची में भी इसे जल निकाय के रूप में दर्ज किया गया है।
दस्तावेजों के जरिए कब्जे का दावा
फाउंडेशन ने ट्रिब्यूनल के सामने कई सबूत पेश किए हैं, जिनमें मौके की तस्वीरें और RTI के तहत ब्लॉक डेवलपमेंट ऑफिसर (उत्तर-पूर्व) से मिला जवाब शामिल है। याचिका में दावा किया गया है कि इस जमीन का उपयोग कब्रिस्तान के लिए नहीं किया गया था, फिर भी यहां अतिक्रमण हो गया है। याचिकाकर्ता का कहना है कि उन्होंने कई बार संबंधित अधिकारियों से शिकायत की, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
ट्रिब्यूनल ने मामले की गंभीरता को देखते हुए प्रतिवादियों को नोटिस जारी करने का निर्देश दिया है। साथ ही, यह भी उल्लेख किया गया कि दिल्ली के जल निकायों के संरक्षण का एक व्यापक मुद्दा पहले से ही NGT के पास लंबित है। इसी कारण, इस वर्तमान आवेदन को भी उसी मुख्य केस (ओरिजिनल एप्लीकेशन नंबर 633/2024) के साथ जोड़ दिया गया है और अब इसकी अगली सुनवाई 11 जनवरी, 2027 को होगी।