गामरी में अवैध फैक्ट्रियों पर NGT का बड़ा एक्शन, MCD को ताले तोड़ने का मिला अधिकार
NGT ने MCD को गामरी गांव में अवैध औद्योगिक इकाइयों के ताले तोड़ने का अधिकार दिया है ताकि प्रदूषण फैलाने वाली यूनिट्स की जांच हो सके।

पूर्वी दिल्ली के गामरी गांव में अवैध रूप से चल रही औद्योगिक इकाइयों के खिलाफ नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) ने एक बड़ा और सख्त कदम उठाया है। ट्रिब्यूनल ने दिल्ली नगर निगम (MCD) को यह अधिकार दे दिया है कि अगर किसी संदिग्ध फैक्ट्री के मालिक निरीक्षण के दौरान ताला लगाकर बाधा डालते हैं, तो अधिकारी उन तालों को तोड़कर अंदर प्रवेश कर सकते हैं।
यह फैसला जस्टिस प्रकाश श्रीवास्तव और एक्सपर्ट मेंबर डॉ. अफरोज अहमद की बेंच ने 26 अक्टूबर 2026 को सुनाया। दरअसल, यह पूरी कार्रवाई कार्यकर्ता वरुण गुलाटी द्वारा दायर एक याचिका के बाद शुरू हुई। याचिका में आरोप लगाया गया था कि गामरी इलाके में 'रेड' कैटेगरी की कई इंडस्ट्रीज अवैध रूप से काम कर रही हैं। ये वो इकाइयां हैं जिनका प्रदूषण इंडेक्स स्कोर 60 या उससे अधिक है और जो पर्यावरण को गंभीर नुकसान पहुंचा रही हैं।
प्रदूषण फैलाने वाली यूनिट्स पर कसेगा शिकंजा
इन अवैध इकाइयों में मुख्य रूप से मेटल सरफेस ट्रीटमेंट, इलेक्ट्रोप्लेटिंग, पाउडर कोटिंग, ग्लास मेल्टिंग और फैब्रिक डाइंग जैसे काम किए जा रहे हैं, जिनसे स्थानीय स्तर पर प्रदूषण का स्तर काफी बढ़ गया है। अधिकारियों ने पहले बताया था कि जब भी वे निरीक्षण के लिए पहुँचते हैं, तो फैक्ट्री मालिक ताले लगाकर उन्हें अंदर जाने से रोक देते हैं। इसी समस्या को खत्म करने के लिए NGT ने दिल्ली नगर निगम अधिनियम, 1957 की धारा 431 और 433 का हवाला देते हुए अधिकारियों को जबरन प्रवेश का अधिकार दिया है।
अब एक जॉइंट कमेटी बनाई गई है जिसमें राजस्व विभाग, दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (DPCC), MCD, BSES और दिल्ली पुलिस के प्रतिनिधि शामिल होंगे। यह कमेटी गामरी इलाके की सभी संदिग्ध साइटों का फिर से व्यापक निरीक्षण करेगी। ट्रिब्यूनल ने स्पष्ट निर्देश दिया है कि इस पूरी जांच की विस्तृत रिपोर्ट अगली सुनवाई से कम से कम एक हफ्ते पहले जमा करनी होगी।