गुरुग्राम के मेफिल्ड गार्डन में अवैध निर्माण पर एनजीटी ने लगाई रोक

गुरुग्राम में पर्यावरण नियमों के उल्लंघन और अवैध निर्माण के मामले में नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल यानी एनजीटी ने सख्त रुख अपनाया है। एनजीटी चेयरपर्सन जस्टिस प्रकाश श्रीवास्तव और एक्सपर्ट मेंबर डॉ. अफरोज अहमद की खंडपीठ ने सुनवाई करते हुए आदेश दिया है कि अगली सुनवाई 16 नवंबर 2026 तक विवादित स्थल पर कोई निर्माण कार्य नहीं किया जाए। एनजीटी ने अपने आदेश में कहा है कि इस क्षेत्र में भूजल का अवैध दोहन किया जा रहा है और सीवेज प्रबंधन में भी कमियां पाई गई हैं। इसके अलावा 4 अप्रैल और 4 अक्टूबर 2024 के पुराने आदेशों का भी उल्लंघन हो रहा है। इस मामले में सभी पक्षों को नोटिस जारी कर दिए गए हैं।
मेफिल्ड गार्डन टाउनशिप से जुड़ा है पूरा मामला
यह पूरा मामला सेक्टर-47, 50, 51, 52, 53, 54 और 57 में फैली हुई 327 एकड़ की मेफील्ड गार्डन टाउनशिप से जुड़ा हुआ है। डेवलपर्स द्वारा जरूरी शर्तें पूरी न किए जाने की वजह से फरवरी 2023 में इसके लाइसेंस रद्द कर दिए गए थे। लाइसेंस रद्द होने के बाद भूखंड एचएस-02 और पीएस-08 सहित पूरी टाउनशिप के प्लॉट कानूनी रूप से गैर-हस्तांतरणीय हो चुके हैं। ऑर्किड आइलैंड आरडब्ल्यूए की ओर से अधिवक्ता यतीश गोयल ने शनिवार को यह जानकारी दी है कि नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल के यह आदेश शुक्रवार शाम को पोर्टल पर अपलोड किए गए हैं।
पीएमओ पोर्टल पर दर्ज कराई गई है शिकायत
ऑर्किड आइलैंड आरडब्ल्यूए की तरफ से अधिवक्ता यतीश गोयल ने पीएमओ पोर्टल पर आधिकारिक शिकायत दर्ज कराई है। इस शिकायत में गंभीर आरोप लगाए गए हैं कि एसईआईएए हरियाणा के अधिकारियों द्वारा बिना वैध स्वामित्व के चंपा देवी जयपुरिया चैरिटेबल ट्रस्ट को पर्यावरण मंजूरी दी गई है। आरोप यह भी है कि पूरे क्षेत्र के लिए अनिवार्य कम्युलेटिव इम्पेक्ट असेसमेंट के बिना ही टुकड़ों में मंजूरी दे दी गई और एनजीटी तथा एसईआईएए के पुराने आदेशों की अवहेलना की गई है। शिकायत में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 के तहत निष्पक्ष जांच कराने की मांग की गई है। दूसरी तरफ, पर्यावरण मंत्रालय ने भी इस पूरे मामले का संज्ञान लेते हुए हरियाणा पर्यावरण विभाग से इस पर विस्तृत जवाब मांगा है।