गाजीपुर लैंडफिल केस: लैब में उपकरणों की कमी पर NGT सख्त, DPCC सदस्य सचिव को तलब किया

Kittu Kumari16 October 20262 min read0 viewsDelhi Local
गाजीपुर लैंडफिल केस: लैब में उपकरणों की कमी पर NGT सख्त, DPCC सदस्य सचिव को तलब किया

दिल्ली के गाजीपुर लैंडफिल साइट पर लगी भीषण आग और वहां बढ़ते प्रदूषण के मामले में नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) ने कड़ा रुख अपनाया है। ट्रिब्यूनल ने दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (DPCC) के सदस्य सचिव को अगली सुनवाई में वर्चुअली पेश होने और अपनी प्रयोगशाला (लैब) की वर्तमान स्थिति व उपलब्ध उपकरणों का पूरा ब्यौरा देने का निर्देश दिया है। यह आदेश तब आया जब DPCC ने खुद स्वीकार किया कि उनके पास गाजीपुर लैंडफिल के आसपास के भूजल (ग्राउंडवाटर) की जांच के लिए जरूरी उपकरण मौजूद नहीं हैं।

पूरा मामला अप्रैल 2024 में मीडिया में आई एक रिपोर्ट के बाद शुरू हुआ था, जिसमें गाजीपुर लैंडफिल में लगी बड़ी आग का जिक्र था। जस्टिस प्रकाश श्रीवास्तव और एक्सपर्ट मेंबर डॉ. अफरोज अहमद की बेंच ने इस मामले की सुनवाई की। सुनवाई के दौरान जब DPCC के वकील ने बताया कि जांच के लिए आवश्यक मशीनें उपलब्ध नहीं हैं और इसके लिए गवर्नमेंट ई-मार्केटप्लेस (GeM) पोर्टल पर टेंडर जारी किया गया है, तो ट्रिब्यूनल ने इस बात पर गहरी नाराजगी जताई। NGT का मानना है कि प्रदूषण नियंत्रण जैसी महत्वपूर्ण संस्था के पास एक पूरी तरह सुसज्जित लैब होनी चाहिए।

ग्राउंडवाटर सैंपलिंग पर था जोर

गौरतलब है कि NGT ने पहले ही DPCC को निर्देश दिया था कि वह सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट रूल्स, 2026 के तहत निर्धारित दायरे में कम से कम 20 अलग-अलग स्थानों से भूजल के नमूने एकत्र करे और उनकी विश्लेषण रिपोर्ट सौंपे। इस दायरे को बाद में गाजीपुर साइट से 1.5 किलोमीटर तक बढ़ा दिया गया था। हालांकि, लैब में संसाधनों की कमी और पिछली सुनवाई में DPCC की अनुपस्थिति के कारण यह प्रक्रिया बाधित हुई।

वहीं, इस मामले में नगर निगम दिल्ली (MCD) की ओर से पेश वकील नरेंद्र पाल सिंह ने दस्तावेज जुटाने के लिए समय मांगा, क्योंकि उन्हें यह केस महज एक दिन पहले सौंपा गया था। अब इस पूरे मामले की अगली सुनवाई 19 जनवरी, 2027 को तय की गई है, जिसमें DPCC को अपनी तैयारी का हिसाब देना होगा।

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