NGT का MCD को आदेश: सिंघोला में बायो-माइनिंग के बाद कचरा डंपिंग शुरू होने पर मांगा जवाब

दिल्ली में नगर निगम (MCD) ने नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) को जानकारी दी है कि उसने मानसून से पहले नालों की सफाई के काम की जल्दबाजी के कारण सिंघोला साइट पर फिर से ड्रेन सिल्ट डालना शुरू कर दिया है। MCD ने यह बात 3 अगस्त 2026 को दिए गए एक हलफनामे में बताई है, जिसकी रिपोर्ट दो दिन बाद सामने आई। यह 7.2 एकड़ की साइट मई 2025 तक बायो-माइनिंग के जरिए जमा सिल्ट से पूरी तरह साफ कर दी गई थी, लेकिन इसके बाद जुलाई 2025 में भी यहां डंपिंग फिर से शुरू हो गई थी। NGT ने इस मामले पर कड़ा रुख अपनाया है।
पर्यावरण नियमों का उल्लंघन और NGT के निर्देश
अक्टूबर 2025 में NGT ने सिंघोला और बवाना में पर्यावरण नियमों के उल्लंघन का मुद्दा उठाया था। ट्रिब्यूनल ने दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (DPCC) को एक विस्तृत रिपोर्ट जमा करने का निर्देश दिया था, जिसके साथ MCD ने भी अपनी प्रगति रिपोर्ट दाखिल की थी। इससे पहले जुलाई 2025 में, ट्रिब्यूनल ने MCD पर कचरा प्रबंधन पर व्यापक रिपोर्ट देने का दबाव बनाया था। इसमें सिल्ट और अक्रिय कचरे को दोबारा इस्तेमाल करने के बजाय फेंकने के कारण और भूजल को दूषित होने से बचाने के उपायों की जानकारी मांगी गई थी। अदालत लगातार इस पूरे मामले की निगरानी कर रही है।
MCD की नई योजना और प्रोसेसिंग प्लांट
MCD का कहना है कि वह सिंघोला के पास आने वाली सिल्ट के रोजाना प्रोसेसिंग और निपटान के लिए एक सुविधा स्थापित कर रहा है और नए कचरे के ढेर बनने से रोकने के लिए नए टेंडर जारी किए गए हैं। यह कदम नवंबर 2025 में घोषित उस बड़ी योजना का हिस्सा है, जिसके तहत चार नए कचरा प्रोसेसिंग प्लांट बनाए जाने हैं। इसमें सिंघोला में 700 टन प्रतिदिन क्षमता वाली यूनिट भी शामिल है। प्रशासन इस समस्या के स्थायी समाधान के लिए काम कर रहा है।