NGT का DPCC को निर्देश: सात प्रदूषण फैलाने वाली इकाइयों से पर्यावरण मुआवजा वसूली पर विस्तृत रिपोर्ट दें

नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) ने दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (DPCC) को सात औद्योगिक इकाइयों से पर्यावरण क्षति मुआवजा (EDC) की वसूली के संबंध में एक व्यापक रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है। चेयरपर्सन जस्टिस प्रकाश श्रीवास्तव और विशेषज्ञ सदस्य ए. सेंथिल वेल की पीठ ने DPCC द्वारा पहले सौंपी गई रिपोर्ट को 'अस्पष्ट' और अपर्याप्त बताया। 21 सितंबर 2026 को हुई सुनवाई के दौरान ट्रिब्यूनल ने निर्देश दिया कि DPCC चार सप्ताह के भीतर विस्तृत जानकारी दे। बवाना औद्योगिक क्षेत्र और ख्याला में स्थित इन सात इकाइयों के खिलाफ क्लोजर ऑर्डर, EDC लगाने के आदेश और रिकवरी नोटिस जारी करने की विशिष्ट तिथियां रिपोर्ट में शामिल होनी चाहिए।
वसूली और लंबित बकाये की जानकारी
जांच में यह सामने आया कि सात में से केवल एक इकाई ने आवश्यक मुआवजा जमा किया है। कुछ मामले सात साल पुराने हैं, और DPCC ने NGT की सुनवाई से ठीक पहले सितंबर 2026 में केवल रिमाइंडर लेटर जारी किए। बकाया राशि में से एक इकाई पर 2019 से 2 करोड़ रुपये का EDC बकाया है, जबकि अन्य पर कुल मिलाकर 47 लाख रुपये से अधिक बकाया है। एक इकाई अभी भी चालू है और वर्तमान में भ्रष्टाचार निरोधक शाखा (Anti-Corruption Branch) की जांच के दायरे में है।
कानूनों का उल्लंघन और NGT की कार्रवाई
NGT ने इस बात पर प्रकाश डाला कि ये इकाइयां जल (प्रदूषण निवारण और नियंत्रण) अधिनियम, 1974 और वायु (प्रदूषण निवारण और नियंत्रण) अधिनियम, 1981 का उल्लंघन कर रही थीं। इन इकाइयों के पास न तो 'स्थापना के लिए सहमति' (Consent to Establish) और न ही 'संचालन के लिए सहमति' (Consent to Operate) प्रमाण पत्र थे, और न ही आवश्यक प्रदूषण नियंत्रण उपकरण थे। ट्रिब्यूनल ने पर्यावरण क्षरण के लिए जवाबदेही सुनिश्चित करने हेतु 'प्रदूषक भुगतान करे' (Polluter Pays) के सिद्धांत के प्रवर्तन को दोहराया।