नई दिल्ली में अंतरराष्ट्रीय सम्मेलनों की धूम, ग्लोबल इकोनॉमी और सांस्कृतिक विरासत पर मंथन

देश की राजधानी नई दिल्ली इस समय दुनिया के केंद्र में है। शहर में एक के बाद एक कई बड़े अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन आयोजित किए जा रहे हैं, जिनमें वैश्विक अर्थव्यवस्था, शिक्षा, स्वास्थ्य और सांस्कृतिक संबंधों जैसे अहम मुद्दों पर चर्चा हो रही है। इन कार्यक्रमों की कमान दुनिया के दिग्गज नेताओं और विशेषज्ञों ने संभाली है, जिससे दिल्ली में अंतरराष्ट्रीय हलचल तेज हो गई है।
सबसे प्रमुख आयोजन ब्लूमबर्ग न्यू इकोनॉमी फोरम 2026 है, जिसकी शुरुआत आज हो चुकी है और यह 15 अक्टूबर तक चलेगा। 'ए वर्ल्ड इन प्ले: डिफाइनिंग द न्यू लीवर्स ऑफ पावर' थीम पर आधारित इस फोरम में 500 से अधिक सार्वजनिक और निजी क्षेत्र के दिग्गज शामिल हुए हैं। इसमें विभिन्न देशों के राष्ट्राध्यक्ष, केंद्रीय बैंकों के गवर्नर और फॉर्च्यून 100 कंपनियों के सीईओ हिस्सा ले रहे हैं। इस मंच पर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), आर्थिक नीतियों और बदलती वैश्विक राजनीति जैसे गंभीर विषयों पर बातचीत की जा रही है।
इस अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने संबोधन में एक बड़ी बात कही। उन्होंने जोर देकर कहा कि भारत में जो सुधार किए जा रहे हैं, वे किसी मजबूरी के कारण नहीं बल्कि दृढ़ विश्वास के साथ किए गए हैं। पीएम मोदी ने स्पष्ट किया कि 21वीं सदी में तकनीक, डेटा और इनोवेशन ही शक्ति के असली स्रोत हैं।
शिक्षा, स्वास्थ्य और संस्कृति का संगम
सिर्फ अर्थव्यवस्था ही नहीं, बल्कि 13 अक्टूबर को दिल्ली के हयात रीजेंसी में 36वां ईलेट्स वर्ल्ड एजुकेशन समिट 2026 भी आयोजित किया जा रहा है। इसके साथ ही ग्लोबल एमएसएमई बिजनेस समिट और डायबिटीज व पोषण से जुड़े अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन भी चल रहे हैं, जहां दुनिया भर के विशेषज्ञ स्वास्थ्य और व्यापार की चुनौतियों पर चर्चा कर रहे हैं।
वहीं, सांस्कृतिक मोर्चे पर भी एक बड़ा आयोजन होने जा रहा है। इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र (IGNCA) और संस्कृति मंत्रालय मिलकर 14 से 16 अक्टूबर तक विज्ञान भवन में 'बृहत्तर भारत' अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन करेंगे। इस कार्यक्रम में चीन, जापान, मंगोलिया, नेपाल और ईरान समेत 50 देशों के प्रतिनिधि शामिल होंगे।
केंद्रीय संस्कृति और पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत इस कार्यक्रम का उद्घाटन करेंगे। इस दौरान प्रधानमंत्री मोदी का एक विशेष वीडियो संदेश भी साझा किया जाएगा और 'कॉमन कल्चरल हेरिटेज ऑफ एशिया' नामक एक प्रदर्शनी लगाई जाएगी, जो एशिया के साझा ऐतिहासिक और सभ्यतागत संबंधों को दर्शाएगी।