नई दिल्ली में कचरे से बनी खाद और भित्ति चित्रों से शहर का हो रहा है कायाकल्प

Kittu Kumari23 September 20262 min read0 viewsDelhi Local
नई दिल्ली में कचरे से बनी खाद और भित्ति चित्रों से शहर का हो रहा है कायाकल्प

नई दिल्ली नगर पालिका परिषद यानी एनडीएमसी ने पिछले एक साल में चाणक्यपुरी के मधु लिमये मार्ग स्थित प्लांट में कचरे से 13,000 किलोग्राम जैविक खाद बनाई है। शहर को सुंदर बनाने के लिए Connaught Place इलाके में भारतीय कला को दर्शाने वाली 4,200 वर्ग फीट दीवारों पर पेंटिंग यानी भित्ति चित्र बनाए गए हैं। एनडीएमसी के अध्यक्ष मनोज कुमार द्विवेदी ने 'सेवा संकल्प अभियान' के तहत 17 सितंबर से 23 सितंबर तक चले सात दिवसीय कार्यशाला में योगदान देने वाले सात सफाई कर्मचारियों और 15 कलाकारों को सम्मानित किया है। इस बारे में अधिक जानकारी के लिए यहाँ क्लिक करें

कचरे से धन और हरियाली की पहल

अध्यक्ष मनोज कुमार द्विवेदी ने 'वेस्ट टू वेल्थ' और 'वेस्ट टू ग्रीनरी' के सिद्धांतों पर जोर दिया है और अनुपम कॉलोनी के मॉडल को दूसरे इलाकों में भी लागू करने का प्रस्ताव रखा है। ये सभी काम 'ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम-2026' के तहत हो रहे हैं जो पूरे देश में 1 अप्रैल 2026 से लागू हैं और नई दिल्ली जिला प्रशासन इन्हें सख्ती से लागू करने की तैयारी में है। इसके अलावा, दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने 17 अगस्त 2026 से 2 अक्टूबर 2026 तक चलने वाले 'दिल्ली को कूड़े से आजादी - स्वच्छता अभियान 2026' की शुरुआत की है। मुख्यमंत्री ने कचरे के प्रबंधन के चार सूत्रों पर जोर दिया है जो हैं: संग्रह, सफाई, रूपांतरण और सर्कुलर इकोनॉमी, और अधिकारियों को हर वार्ड में रोज तीन घंटे निरीक्षण करने का निर्देश दिया है।

स्वच्छता पोर्टल और कचरा प्रसंस्करण इकाइयां

तकनीकी सुधारों के तहत शहरी विकास मंत्री आशीष सूद ने सफाई की प्रगति पर नजर रखने के लिए 6 अगस्त 2025 को एक 'स्वच्छता पोर्टल' लॉन्च किया था। साल 2026 के नए नियमों के तहत कचरे को चार श्रेणियों में बांटा गया है जो हैं: गीला, सूखा, सेनेटरी और विशेष देखभाल वाला कचरा। भविष्य की क्षमता को बढ़ाने के लिए दिल्ली में साल 2026 के अंत तक पांच नए कचरा प्रसंस्करण प्लांट बनाए जाने की योजना है। इसके साथ ही ओखला, भलस्वा और गाजीपुर के पुराने कचरे के ढेरों को बायो-माइनिंग तकनीक से साफ करके 255.03 लाख मीट्रिक टन कचरे का निस्तारण किया गया है और जनता के उपयोग के लिए लगभग 75 एकड़ जमीन को खाली कराया गया है।

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