नेहरू प्लेस डिस्ट्रिक्ट सेंटर बना 'नो-हॉकिंग' जोन, हाई कोर्ट ने दिए अवैध वेंडर्स को हटाने के आदेश

दिल्ली के मशहूर आईटी हब और बिजनेस सेंटर नेहरू प्लेस में अब अवैध रूप से सामान बेचने वालों की मनमानी नहीं चलेगी। दिल्ली हाई कोर्ट ने एक बड़ा फैसला सुनाते हुए नेहरू प्लेस डिस्ट्रिक्ट सेंटर को 'नो-हॉकिंग' और 'नो-वेंडिंग' जोन घोषित कर दिया है। कोर्ट ने साफ कर दिया है कि अब यहां केवल एक निर्धारित क्षेत्र को छोड़कर बाकी पूरी जगह पर फेरी लगाना या दुकान लगाना प्रतिबंधित होगा।
जस्टिस प्रतिभा एम. सिंह और जस्टिस दिनेश भट्ट की खंडपीठ ने यह आदेश जारी किया है। अदालत ने नगर निगम दिल्ली (MCD) को पूरी शक्ति दी है कि वह 12 अक्टूबर 2026 से इस इलाके से सभी अनधिकृत वेंडर्स को हटा सके। सुनवाई के दौरान यह चौंकाने वाली बात सामने आई कि नेहरू प्लेस डिस्ट्रिक्ट सेंटर में वर्तमान में 400 से ज्यादा वेंडर्स काम कर रहे हैं, जिनमें से केवल 90 के पास ही कानूनी अनुमति है। बाकी के सैकड़ों वेंडर्स बिना किसी मंजूरी के यहां अपना कारोबार चला रहे थे।
अधिकृत वेंडर्स के लिए विकल्प और सुरक्षा इंतजाम
अदालत ने मानवीय पहलू को देखते हुए यह निर्देश दिया है कि जिन 90 वेंडर्स के पास वैध लाइसेंस हैं, उन्हें तब तक किसी वैकल्पिक स्थान से काम करने की अनुमति दी जाए, जब तक टाउन वेंडिंग कमेटी-II (TVC-II) उनके वेंडिंग अधिकारों पर अंतिम फैसला नहीं ले लेती।
इस आदेश को सख्ती से लागू करने के लिए हाई कोर्ट ने दिल्ली पुलिस को MCD और दिल्ली विकास प्राधिकरण (DDA) के साथ पूरी तरह सहयोग करने का निर्देश दिया है। इसके अलावा, सुरक्षा मानकों को देखते हुए दिल्ली फायर सर्विस को भी जिम्मेदारी सौंपी गई है। जैसे ही अवैध वेंडर्स को हटाया जाएगा, फायर सर्विस पूरी जगह का निरीक्षण करेगी और अपनी रिपोर्ट दाखिल करेगी। कोर्ट इस मामले की अगली समीक्षा 30 नवंबर को करेगा।
कोर्ट ने अपनी दलीलों में 26 सितंबर की तस्वीरों का हवाला दिया, जिससे इस कदम की जरूरत साफ नजर आई। साथ ही, अदालत ने 'स्ट्रीट वेंडर्स एक्ट 2014' और सुप्रीम कोर्ट के पिछले फैसलों का जिक्र करते हुए कहा कि वेंडर्स को हटाने की प्रक्रिया सावधानी, निष्पक्षता और जिम्मेदारी के साथ होनी चाहिए। अधिकारियों को यह सुनिश्चित करना होगा कि वेंडर्स को निर्धारित वेंडिंग जोन में स्थानांतरित करने में उनकी मदद की जाए।