मंदिर मार्ग थाने में भारी हंगामा, प्रदर्शन के कारण नेहा बोरा की सुनवाई बाधित
मंदिर मार्ग पुलिस स्टेशन में बीजेपी समर्थकों के प्रदर्शन के कारण एक्टिविस्ट नेहा बोरा की सुनवाई नहीं हो सकी। पढ़ें पूरी खबर।

दिल्ली के मंदिर मार्ग पुलिस स्टेशन में उस वक्त तनाव बढ़ गया जब बीजेपी और दक्षिणपंथी समर्थकों ने वहां जोरदार प्रदर्शन शुरू कर दिया। इस हंगामे का सीधा असर एक्टिविस्ट नेहा बोरा की निर्धारित सुनवाई पर पड़ा, जिसे इस विरोध प्रदर्शन के कारण बाधित करना पड़ा। नेहा बोरा, जो मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ चुनावी अनियमितताओं के आरोपों को लेकर मुखर रही हैं, ने इस पूरी स्थिति पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने दिल्ली पुलिस की कार्यप्रणाली पर तंज कसते हुए पूछा कि आखिर 'शांति बनाए रखने' की परिभाषा क्या है, जब एक तरफ जनता का भारी आक्रोश दिख रहा है।
कानूनी लड़ाई और पुलिसिया कार्रवाई का सिलसिला
नेहा बोरा और 'कॉकरोच जनता पार्टी' (CJP) के सदस्यों के लिए पिछले कुछ दिन काफी चुनौतीपूर्ण रहे हैं। हाल ही में 23 अक्टूबर 2026 को दिल्ली हाई कोर्ट ने नेहा बोरा की उस याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें उन्होंने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 126 के तहत जारी 'पीस बॉन्ड' नोटिस को चुनौती दी थी। इस नोटिस के तहत उन्हें 10,000 रुपये का बॉन्ड और एक जमानतदार पेश करने को कहा गया था। हालांकि, कोर्ट ने पुलिस को निर्देश दिया है कि वे इस नोटिस के समर्थन में इस्तेमाल किए गए सभी दस्तावेज और सबूत नेहा बोरा को उपलब्ध कराएं, ताकि प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का पालन हो सके।
यह विवाद यहीं खत्म नहीं होता। इससे पहले 16 अक्टूबर को 'लेहरा दो तिरंगा' मार्च के दौरान नेहा बोरा को दिल्ली पुलिस एक्ट की धारा 65 के तहत हिरासत में लिया गया था। उनके साथ ही CJP के अन्य नेता जैसे आशुतोष रंका, सौरव दास और अजिंक्य शिंदे को भी कानूनी कार्रवाई का सामना करना पड़ा है। रंका और दास को जंतर मंतर पर हुए प्रदर्शनों के बाद पांच दिनों की न्यायिक हिरासत में रखा गया था, जबकि पार्टी के संस्थापक अभिजीतdeepcopy को 17 अक्टूबर को 50,000 रुपये के बॉन्ड पर रिहा किया गया।
यह पूरा विवाद मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग से जुड़ा है। कॉकरोच जनता पार्टी और उनके समर्थक 'वोट चोरी' के गंभीर आरोपों का हवाला देते हुए पूरी चुनावी प्रक्रिया पर सवाल उठा रहे हैं और आयुक्त के पद छोड़ने की मांग पर अड़े हुए हैं।