नीट प्रोटेस्ट हिंसा: सुप्रीम कोर्ट पैनल 29 और 30 अक्टूबर को दिल्ली में सुनेगा सबूत
जुलाई में हुए नीट प्रोटेस्ट में हिंसा और पुलिसिया कार्रवाई की जांच के लिए सुप्रीम कोर्ट पैनल 29-30 अक्टूबर को दिल्ली में सबूत सुनेगा।

जुलाई 2026 में नीट-यूजी परीक्षा को लेकर दिल्ली में हुए विरोध प्रदर्शनों के दौरान हुई हिंसा और पुलिस की कथित बर्बरता के मामले में अब सुप्रीम कोर्ट की हाई-पावर्ड इंक्वायरी कमेटी (HPEC) एक्शन मोड में है। यह पैनल 29 और 30 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली में पब्लिक सिटिंग आयोजित करेगा, ताकि उन लोगों से सबूत और गवाहियां जुटाई जा सकें जो इस हिंसा से सीधे तौर पर प्रभावित हुए थे।
यह पूरी जांच उस घटना के बाद शुरू हुई जब 20 जुलाई 2026 को कॉकरोच जनता पार्टी (CJP), ऑल इंडिया स्टूडेंट्स फेडरेशन और अन्य छात्र संगठनों ने संसद की ओर मार्च निकाला था। इस दौरान प्रदर्शनकारियों और सुरक्षा बलों के बीच भारी झड़प हुई, जिसमें लाठीचार्ज और आंसू गैस के गोलों का इस्तेमाल किया गया। सबसे गंभीर आरोप पेलेट गन के इस्तेमाल और महिला प्रदर्शनकारियों के साथ बदसलूकी को लेकर लगे, जिन्हें दिल्ली पुलिस ने नकारा था, लेकिन रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) द्वारा इनके इस्तेमाल की खबरें सामने आई थीं।
शिकायत दर्ज कराने के लिए इन बातों का रखें ध्यान
सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित इस पांच सदस्यीय पैनल ने आम जनता और प्रभावित लोगों को अपनी शिकायतें और सबूत पेश करने के लिए आमंत्रित किया है। जो लोग अपनी बात रखना चाहते हैं, वे दोनों दिन सुबह 11:30 बजे से दोपहर 3 बजे के बीच 'शिक्षा सदन, 17, राउज एवेन्यू इंस्टीट्यूशनल एरिया, नई दिल्ली' स्थित कमेटी के कार्यालय में पहुंच सकते हैं। ध्यान रहे कि वहां जाते समय वैध पहचान पत्र (ID Proof) साथ ले जाना अनिवार्य है।
रिटायर्ड जस्टिस आर. सुभाष रेड्डी की अध्यक्षता वाली इस कमेटी में पूर्व मुख्य न्यायाधीश रवि शंकर झा, जस्टिस शालिंदर कौर, पूर्व सीबीआई डायरेक्टर ऋषि कुमार शुक्ला और रिटायर्ड डीजीपी एल.आर. बिश्नोई शामिल हैं। यह पैनल निष्पक्ष रूप से इस बात की जांच कर रहा है कि क्या सुरक्षा बलों ने जरूरत से ज्यादा बल प्रयोग किया या प्रदर्शनकारियों द्वारा संपत्ति को नुकसान पहुंचाया गया।
जो लोग व्यक्तिगत रूप से नहीं पहुंच सकते, उनके लिए कमेटी ने hpec.nic.in पर एक ऑनलाइन पोर्टल भी शुरू किया है। सुप्रीम कोर्ट ने इस पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता बनाए रखने के निर्देश दिए हैं और गवाहों की गोपनीयता सुनिश्चित करने की बात कही है।