CBRN इमरजेंसी से निपटने के लिए NDRF और SDRF के बीच समन्वय जरूरी: DG पीयूष आनंद
NDRF DG पीयूष आनंद ने गाजियाबाद में CBRN इमरजेंसी से निपटने के लिए राज्यों की SDRF के साथ बेहतर समन्वय और ट्रेनिंग पर जोर दिया।

गाजियाबाद में आयोजित एक विशेष प्रतियोगिता के दौरान नेशनल डिजास्टर रिस्पांस फोर्स (NDRF) के महानिदेशक पीयूष आनंद ने आपदा प्रबंधन की तैयारियों को लेकर महत्वपूर्ण बातें कहीं। उन्होंने जोर देकर कहा कि केमिकल, बायोलॉजिकल, रेडियोलॉजिकल और न्यूक्लियर (CBRN) जैसी गंभीर आपात स्थितियों से निपटने के लिए NDRF और राज्य आपदा प्रतिक्रिया बलों (SDRF) के बीच नियमित संयुक्त प्रशिक्षण और तालमेल होना बेहद जरूरी है।
गाजियाबाद स्थित 8वीं बटालियन NDRF कैंपस में 'द्वितीय राष्ट्रीय SDRF CBRN प्रतियोगिता-2026' के समापन समारोह को संबोधित करते हुए DG पीयूष आनंद ने 'टीम इंडिया' के विजन पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि चाहे राष्ट्रीय बल हो या राज्य बल, सभी का एकमात्र लक्ष्य लोगों की जान बचाना और उनकी सेवा करना है। उनके अनुसार, जब दोनों बल मिलकर ट्रेनिंग और सिमुलेशन एक्सरसाइज करेंगे, तभी ऑपरेशनल गैप को भरा जा सकेगा और आधुनिक आपदाओं की चुनौतियों का सामना करने के लिए तकनीकी क्षमताओं को बढ़ाया जा सकेगा।
अदृश्य खतरों से निपटने के लिए 'मसल मेमोरी' पर जोर
DG आनंद ने CBRN इमरजेंसी की गंभीरता को समझाते हुए बताया कि ये खतरे 'अदृश्य' होते हैं और इनके आने से पहले कोई चेतावनी संकेत नहीं मिलते। ऐसे में रिस्पांस टीम के लिए कठोर और बार-बार सिमुलेशन ड्रिल करना अनिवार्य है। उन्होंने समझाया कि आपदा के समय अत्यधिक तनाव होता है, इसलिए जीवन रक्षक प्रोटोकॉल और उपकरणों के इस्तेमाल का तरीका जवानों की 'मसल मेमोरी' (Muscle Memory) में बसा होना चाहिए। इससे वे भारी दबाव के बीच भी तेजी और सटीकता से सुरक्षित रेस्क्यू ऑपरेशन चला सकेंगे।
इस तीन दिवसीय प्रतियोगिता का आयोजन 2 से 4 नवंबर तक किया गया, जिसमें देश के 19 राज्यों की टीमों ने हिस्सा लिया। क्षेत्रीय स्तर की स्पर्धाओं के बाद राजस्थान, बिहार, हरियाणा, उत्तराखंड, पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश और गुजरात की आठ टीमों को फाइनल के लिए चुना गया।
प्रतियोगिता के परिणामों की बात करें तो तमिलनाडु SDRF ने पहला स्थान हासिल किया, जबकि उत्तराखंड SDRF दूसरे और बिहार SDRF तीसरे स्थान पर रही। NDRF के मुताबिक, इस पूरी कवायद का मुख्य उद्देश्य CBRN आपात स्थितियों में SDRF कर्मियों की परिचालन क्षमता, तकनीकी दक्षता और त्वरित प्रतिक्रिया को बेहतर बनाना है, ताकि किसी भी आपदा के दौरान जान-माल की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।