NCR की प्रदूषित फैक्ट्रियों में लगेंगे PTZ कैमरे, रियल-टाइम होगी निगरानी

दिल्ली और आसपास के इलाकों में प्रदूषण को रोकने के लिए अब तकनीक का सहारा लिया जा रहा है। वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) ने एक बड़ा फैसला लेते हुए नेशनल कैपिटल रीजन (NCR) की सभी अत्यधिक प्रदूषित फैक्ट्रियों के लिए PTZ (Pan-Tilt-Zoom) कैमरे लगाना अनिवार्य कर दिया है। इन कैमरों की मदद से अब अधिकारी दूर बैठे ही यह देख सकेंगे कि फैक्ट्रियों में किस तरह का ईंधन इस्तेमाल हो रहा है और प्रदूषण नियंत्रण नियमों का पालन हो रहा है या नहीं।
इस नई व्यवस्था के तहत सभी संबंधित उद्योगों को 30 नवंबर 2026 तक ये कैमरे लगाने होंगे। ये कैमरे केवल रिकॉर्डिंग नहीं करेंगे, बल्कि RTSP प्रोटोकॉल के जरिए लाइव वीडियो फीड सीधे केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB), दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (DPCC) और राज्यों के प्रदूषण नियंत्रण बोर्डों को भेजेंगे। कैमरों को खास तौर पर उन जगहों पर लगाया जाएगा जहां ईंधन डाला जाता है, फर्नेस और भट्ठियों के चार्जिंग एरिया, गैस मीटर और चिमनियों के पास, ताकि उत्सर्जन पर पैनी नजर रखी जा सके।
क्यों पड़ी इस सख्त निगरानी की जरूरत?
CAQM की फ्लाइंग स्क्वॉड ने जब अचानक कई फैक्ट्रियों का निरीक्षण किया, तो चौंकाने वाली बातें सामने आईं। जांच में पाया गया कि कई इकाइयां नियमों को ताक पर रखकर प्रतिबंधित या गैर-अनुमोदित ईंधन का उपयोग कर रही थीं। अधिकारियों का मानना है कि सर्दियों के दौरान जब हवा की गति कम होती है, तब औद्योगिक उत्सर्जन क्षेत्रीय वायु गुणवत्ता को बुरी तरह प्रभावित करता है।
प्रदूषण पर लगाम कसने की यह मुहिम काफी तेजी से आगे बढ़ रही है। आंकड़ों के मुताबिक, 28 सितंबर 2026 तक 2,354 लक्षित औद्योगिक इकाइयों में से 97.3% ने ऑनलाइन निरंतर उत्सर्जन निगरानी प्रणाली (OCEMS) लगा ली है। वहीं, नियमों की अनदेखी करने वाली 57 फैक्ट्रियों को बंद करने की कार्रवाई की गई है। निगरानी को और पुख्ता करने के लिए DPCC ने 1 अक्टूबर 2026 को एक AI-आधारित इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर की शुरुआत भी की है, जो CCTV, GPS ट्रैकिंग और 60 वायु गुणवत्ता निगरानी स्टेशनों के डेटा के जरिए पूरे क्षेत्र पर नजर रखेगा।