नोएडा और फरीदाबाद समेत 4 शहर प्रदूषण स्टडी में फेल, डेडलाइन के एक साल बाद भी रिपोर्ट अधूरी
नोएडा, फरीदाबाद, मेरठ और खुर्जा प्रदूषण के स्रोतों की पहचान करने वाली अनिवार्य स्टडी पूरी करने में नाकाम रहे।

NCR के शहरों में जहरीली हवा का कहर जारी है, लेकिन हैरानी की बात यह है कि प्रदूषण को रोकने के लिए सबसे जरूरी कदम ही नहीं उठाए जा रहे। नोएडा और फरीदाबाद समेत NCR के चार प्रमुख शहर प्रदूषण के स्रोतों की पहचान करने वाली अनिवार्य 'सोर्स अपोर्शनमेंट स्टडी' (Pollution-Source Study) को पूरा करने में नाकाम रहे हैं। इन शहरों की लापरवाही के कारण यह पता लगाना मुश्किल हो रहा है कि असल में प्रदूषण किस चीज से सबसे ज्यादा फैल रहा है।
नेशनल क्लीन एयर प्रोग्राम (NCAP) के तहत इन अध्ययनों का पूरा होना अनिवार्य था। सेंट्रल पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड (CPCB) ने इस काम को पूरा करने के लिए 15 नवंबर 2025 की समय सीमा तय की थी, जो अब लगभग एक साल पहले ही बीत चुकी है। नोएडा और फरीदाबाद के अलावा मेरठ और खुर्जा भी इस लिस्ट में शामिल हैं, जिन्होंने अब तक अपनी रिपोर्ट जमा नहीं की है। विशेष रूप से फरीदाबाद की बात करें तो यहां यह प्रोजेक्ट साल 2022 में ही शुरू कर दिया गया था, लेकिन अब तक फाइनल रिपोर्ट गायब है।
प्रदूषण की वजहें जानना क्यों है जरूरी?
यह स्टडी इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि इसी के जरिए यह पता चलता है कि हवा में जहर घोलने में औद्योगिक उत्सर्जन, वाहनों का धुआं, निर्माण कार्य, सड़क की धूल या बायोमास जलाने में से किसका योगदान कितना है। जब तक सटीक डेटा नहीं होगा, तब तक प्रदूषण कम करने की ठोस रणनीति बनाना नामुमकिन है।
इस बीच, NCR में हवा की गुणवत्ता बेहद खराब ('Very Poor' से 'Severe') बनी हुई है। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए कमीशन फॉर एयर क्वालिटी मैनेजमेंट (CAQM) ने कड़े कदम उठाए हैं। 5 नवंबर 2026 से धूल उड़ाने वाले सभी तरह के तोड़-फोड़ और बाहरी निर्माण कार्यों पर 15 दिनों का प्रतिबंध लगा दिया गया है। साथ ही, सार्वजनिक स्वास्थ्य संकट को देखते हुए CAQM ने सरकारी और निजी कार्यालयों को 50 प्रतिशत वर्क-फ्रॉम-होम (WFH) लागू करने की सिफारिश की है।