नई दिल्ली से मिली जानकारी के अनुसार, साकेत जिला कोर्ट ने हाल ही में मनी लॉन्ड्रिंग मामले में नयन एन रहेजा की अग्रिम जमानत याचिका को खारिज कर दिया है। रहेजा डेवलपर्स लिमिटेड (RDL) के पूर्व निदेशक को दंडात्मक कार्रवाई से सुरक्षा दी गई थी। प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने इस मामले में केस दर्ज किया था।
यह मनी लॉन्ड्रिंग मामला घर खरीदारों को तय समय के भीतर फ्लैट न देने के मामले से जुड़ा है। स्पेशल जज (PMLA) सचिन जैन ने जांच अधिकारी के समन भेजने पर भी पेश न होने के उनके आचरण को देखते हुए यह फैसला सुनाया। कोर्ट ने कहा कि केवल इस आधार पर कि आवेदक का नाम ECIR की किसी FIR में नहीं है, या नाम होने पर भी चार्जशीट दाखिल नहीं की गई है, इसका यह मतलब नहीं है कि वह PMLA की कार्यवाही से मुक्त हो जाता है। कोर्ट ने माना कि PMLA की धारा 45(1)(ii) की दोहरी शर्तें पूरी नहीं होती हैं।
विशेष लोक अभियोजक (SPP) आनंद कीर्ति ने कोर्ट को बताया कि आरोपी ने दिल्ली उच्च न्यायालय के समक्ष सहयोग करने का आश्वासन दिया था। ED ने दिल्ली और गुरुग्राम में दर्ज कई FIR के आधार पर मामला दर्ज किया था। आरोप है कि Raheja Revanta, Raheja Shilas और अन्य परियोजनाओं के नाम पर ग्राहकों से पैसे जुटाए गए, लेकिन फंड का इस्तेमाल पूरा करने के बजाय कंपनी ने धन का दुरुपयोग किया और फ्लैट नहीं दिए। कोर्ट ने 19 सितंबर के अपने आदेश में कहा कि सात में से केवल दो बार पेश होने और पांच बार उपस्थित न होने के कारण आवेदक अग्रिम जमानत का हकदार नहीं है।
अभियोजक पक्ष के अनुसार, RDL ने विभिन्न परियोजनाओं के विकास के लिए घर खरीदारों से भारी रकम जुटाई थी। आरोपी के वकील ने तर्क दिया कि चूंकि आरोपी के खिलाफ कोई अपराध सिद्ध नहीं हुआ है और PMLA के तहत कोई अपराध नहीं बनता, इसलिए अग्रिम जमानत की अर्जी पर विचार किया जाना चाहिए। हालांकि, ED का मामला यह है कि जांच के दौरान पर्याप्त सामग्री उपलब्ध है कि आवेदक RDL के मामलों को संभाल रहा था। निर्धारित अवधि बीत जाने के बावजूद RDL घर खरीदारों को फ्लैट देने में विफल रही।