तुर्की से प्रत्यर्पित नवप्रीत सिंह को 10 दिन की रिमांड, डिफेंस ने सबूतों पर उठाए सवाल

तुर्की से प्रत्यर्पित किए गए नवप्रीत सिंह को दिल्ली की एक अदालत ने 10 दिन की पुलिस रिमांड पर भेज दिया है। पुलिस इस मामले की गहराई से जांच करना चाहती है और नवप्रीत को इस पूरे नेटवर्क का मुख्य सूत्रधार यानी 'किंगपिन' मान रही है। हालांकि, कोर्ट की कार्यवाही के बाद नवप्रीत के वकील ने पुलिस के दावों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि उनके मुवक्किल को झूठा फंसाया गया है और पुलिस के पास कोई ठोस सबूत नहीं हैं।
अधिवक्ता असगर खान ने मीडिया से बात करते हुए तर्क दिया कि यह मामला पिछले 3-4 सालों से चल रहा है और पुलिस केवल सह-अभियुक्तों के बयानों के आधार पर केस बना रही है। उन्होंने सवाल उठाया कि अगर नवप्रीत इस अपराध में शामिल था, तो पुलिस अब तक उससे कोई आपत्तिजनक सामग्री या नशीले पदार्थ बरामद क्यों नहीं कर पाई? डिफेंस का कहना है कि केवल सह-अभियुक्तों के बयानों की कानूनी वैल्यू बहुत कम होती है जब तक कि उनके समर्थन में स्वतंत्र सबूत न हों।
फोन कॉल और मैसेज को सबूत मानना गलत: वकील
पुलिस ने अदालत को बताया कि नवप्रीत सिंह के अन्य आरोपियों—रामंदीप, गुरजीत और गुरजोत—के साथ फोन कॉल, इंस्टाग्राम मैसेज और अन्य ऐप्स के जरिए बातचीत के सबूत मिले हैं। इस पर पलटवार करते हुए वकील असगर खान ने कहा कि महज किसी से बात करने का मतलब यह नहीं होता कि वह व्यक्ति अपराध में शामिल है। उन्होंने जोर देकर कहा कि जब तक उन बातचीत के ट्रांसक्रिप्ट में सीधे तौर पर ड्रग्स या किसी आपराधिक साजिश का जिक्र नहीं होता, तब तक इन आरोपों को केवल अटकलें ही माना जाना चाहिए।
दूसरी ओर, पुलिस ने अदालत को एक चौंकाने वाली जानकारी दी कि एयरपोर्ट पहुँचते ही नवप्रीत सिंह ने खुद को चोट पहुँचाने की कोशिश की, जिसके बाद उसका एमएलसी (मेडिको-लीगल सर्टिफिकेट) कराया गया। पुलिस के मुताबिक, नवप्रीत को फरवरी 2022 में अदालत द्वारा 'घोषित अपराधी' (प्रोक्लेम्ड ऑफेंडर) करार दिया गया था। जांच टीम अब उसे महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और पंजाब ले जाना चाहती है ताकि नेटवर्क के अन्य कड़ियों को जोड़ा जा सके।
इस मामले में पहले ही चार्जशीट दाखिल की जा चुकी है, जिसमें तीन अन्य आरोपी शामिल हैं। अब नवप्रीत सिंह को 13 अक्टूबर को दोबारा अदालत में पेश किया जाएगा, तब तक वह पुलिस की गिरफ्त में रहेगा।