ई-वेस्ट मैनेजमेंट: अब स्कूली बच्चे सीखेंगे इलेक्ट्रॉनिक कचरे का सही निपटान, सरकार ने शुरू किया अभियान

आज के डिजिटल दौर में इलेक्ट्रॉनिक कचरा यानी ई-वेस्ट एक बड़ी चुनौती बनता जा रहा है। इस समस्या से निपटने और आने वाली पीढ़ी को पर्यावरण के प्रति जिम्मेदार बनाने के लिए केंद्र सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है। शिक्षा मंत्रालय के तहत स्कूल शिक्षा और साक्षरता विभाग (DoSEL) ने देशभर के स्कूली बच्चों के लिए ई-वेस्ट मैनेजमेंट जागरूकता अभियान शुरू किया है। इस पहल का मुख्य उद्देश्य छात्रों को इलेक्ट्रॉनिक कचरे की पहचान, उसके सही पृथक्करण और सुरक्षित रिसाइक्लिंग के तरीकों के बारे में शिक्षित करना है।
यह पूरा अभियान राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अनुरूप तैयार किया गया है, ताकि बच्चों में जिम्मेदार नागरिकता की भावना विकसित हो सके। विभाग के सचिव श्री टी. के. अनिल कुमार ने बताया कि ये कार्यक्रम सरकार के व्यापक पर्यावरणीय एजेंडे का एक अहम हिस्सा हैं। वहीं, संयुक्त सचिव डॉ. अमरप्रीत दुग्गल ने कहा कि 'मिशन लाइफ' के तहत बनाए गए इको क्लब छात्रों को पर्यावरणीय चुनौतियों को समझने और टिकाऊ जीवनशैली अपनाने में मदद कर रहे हैं।
दिल्ली और यूपी में विशेष तैयारी, लखनऊ के स्कूलों में बनेंगे कलेक्शन कॉर्नर
इस अभियान के तहत अलग-अलग राज्यों में विशेष गतिविधियां संचालित की जा रही हैं। दिल्ली में 'समग्र शिक्षा' पहल के जरिए छात्रों को ई-वेस्ट से होने वाले खतरों और उसके सही निपटान के बारे में सिखाया जा रहा है। दिल्ली में पहले भी नवंबर 2025 में सफल कलेक्शन ड्राइव आयोजित की गई थी, जिसमें बच्चों ने घर से पुराने इलेक्ट्रॉनिक उपकरण लाकर निर्धारित बॉक्स में जमा किए थे।
वहीं, उत्तर प्रदेश सरकार 'विशेष अभियान-6' के तहत 28 अक्टूबर 2026 को राज्यव्यापी जागरूकता अभियान चलाने जा रही है। यूपी की स्कूल शिक्षा महानिदेशक (DGSE) सुश्री मोनिका रानी ने लखनऊ के सरकारी स्कूलों के लिए निर्देश जारी किए हैं कि वहां ई-वेस्ट कलेक्शन कॉर्नर बनाए जाएं। इन केंद्रों के माध्यम से इकट्ठा किए गए कचरे को अधिकृत रिसाइकलर्स और रिफर्बिशर्स के जरिए सुरक्षित रूप से प्रोसेस कराया जाएगा।
इस पूरी मुहिम के पीछे कुछ कड़े नियम और लक्ष्य भी हैं। वर्तमान में ई-वेस्ट (मैनेजमेंट) नियम 2022 और 1 अप्रैल 2026 से प्रभावी हुए सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट रूल्स 2026 के तहत काम किया जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि भारत में अभी भी 80-90% ई-वेस्ट अनौपचारिक क्षेत्र (कबाड़ियों) द्वारा संभाला जाता है, जो पर्यावरण के लिए खतरनाक है।
बता दें कि पिछले 'विशेष अभियान 5.0' के दौरान करीब 1 लाख छात्रों ने मिलकर 4,000 किलोग्राम से अधिक ई-वेस्ट इकट्ठा किया था। अब 'विशेष अभियान 6.0' के जरिए देशभर में स्वच्छता से जुड़ी लगभग 7 लाख गतिविधियों को अंजाम देने का लक्ष्य रखा गया है।