वोटर लिस्ट संशोधन के खिलाफ देशभर में बवाल, CEC के इस्तीफे की मांग
चुनाव आयोग के स्पेशल इंटेंसिव रिविजन के खिलाफ SKM और नागरिक समाज का देशव्यापी प्रदर्शन, CEC के इस्तीफे की मांग।

देशभर में मतदाता सूची के 'स्पेशल इंटेंसिव रिविजन' (SIR) को लेकर भारी आक्रोश देखा जा रहा है। शुक्रवार, 23 अक्टूबर 2026 को संयुक्त किसान मोर्चा (SKM) और 'पीपल अगेंस्ट SIR' प्लेटफॉर्म के नेतृत्व में बड़े पैमाने पर प्रदर्शन किए जा रहे हैं। प्रदर्शनकारियों की मुख्य मांग चुनाव आयोग द्वारा किए जा रहे इस विशेष संशोधन को तुरंत वापस लेने और मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की है।
इस आंदोलन को विभिन्न ट्रेड यूनियनों, छात्र संगठनों और नागरिक समाज का समर्थन मिला है। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि चुनावी सूचियों को 2024 से पहले की स्थिति में लाया जाए और चुनाव आयुक्त अधिनियम 2023 के संशोधन को रद्द किया जाए। इसके साथ ही, आंदोलनकारी एक बार फिर पेपर बैलेट (कागजी मतपत्रों) की वापसी और एक निष्पक्ष प्रक्रिया के जरिए नए चुनाव आयोग की नियुक्ति की मांग कर रहे हैं।
'हर गली में जंतर मंतर' अभियान और दिल्ली में अलर्ट
14 अक्टूबर को गठित 'पीपल अगेंस्ट SIR' प्लेटफॉर्म में किसान, मजदूर, छात्र, दलित, आदिवासी और अल्पसंख्यक समुदायों का गठबंधन शामिल है। इस मुहिम में राकेश टिकैत, प्रशांत भूषण, प्रकाश राज, तुषार गांधी और अर्थशास्त्री पराकला प्रभाकर जैसी प्रमुख हस्तियां शामिल हैं। प्रदर्शनकारी "हर गली में जंतर मंतर" अभियान चला रहे हैं, जिसके तहत हर गांव और मोहल्ले में विरोध प्रदर्शन करने की अपील की गई है।
राजधानी दिल्ली में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। प्रदर्शनकारी बंगला साहिब गुरुद्वारे से पटेल चौक स्थित चुनाव आयोग के कार्यालय तक मार्च निकालने की योजना बना रहे हैं, जिसे देखते हुए दिल्ली पुलिस ने ट्रैफिक एडवाइजरी जारी की है। कनॉट प्लेस के इनर सर्कल में दोपहर 3 बजे से ट्रैफिक पाबंदियों की संभावना है और सेंट्रल पार्क को वीकेंड के लिए बंद कर दिया गया है। आयोजकों ने साफ किया है कि यदि उनके मार्च को रोका गया, तो वे 'पीपल्स पार्लियामेंट' (जन संसद) का आयोजन करेंगे।
विवाद की जड़ यह है कि कार्यकर्ताओं और पूर्व चुनाव आयुक्तों का आरोप है कि इस संशोधन प्रक्रिया के जरिए अल्पसंख्यकों और वंचित समुदायों के नाम बड़ी संख्या में वोटर लिस्ट से हटाए गए हैं, जिससे वे मताधिकार से वंचित हो सकते हैं। दूसरी ओर, चुनाव आयोग और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी प्रशासन का दावा है कि यह केवल एक प्रशासनिक प्रक्रिया है, जिसका उद्देश्य मतदाता सूची से डुप्लीकेट और अपात्र प्रविष्टियों को हटाकर उसे शुद्ध करना है।