National Paper Day 2026: नई दिल्ली में पेपर इंडस्ट्री ने सस्टेनेबिलिटी और सर्कुलर इकोनॉमी पर दिया जोर

भारत के पेपर, प्रिंट और पैकेजिंग सेक्टर का प्रतिनिधित्व करने वाले सात प्रमुख संगठनों ने मिलकर 3 अगस्त को नई दिल्ली के भारत मंडपम में National Paper Day 2026 मनाया। इस बारे में अधिक जानकारी ANI News पर देखी जा सकती है। यह ऐतिहासिक कार्यक्रम पहली बार आयोजित किया गया था, जिसमें पूरा फाइबर वैल्यू चेन एक सिंगल प्लेटफॉर्म पर आया ताकि भारतीय पेपर इंडस्ट्री की सस्टेनेबिलिटी और सर्कुलर इकोनॉमी सिद्धांतों के प्रति प्रतिबद्धता को दिखाया जा सके। इसमें शामिल संगठनों में फेडरेशन ऑफ पेपर ट्रेडर्स एसोसिएशन (FPTA), इंडियन पेपर मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन (IPMA), इंडियन एग्रो एंड रिक्रूड पेपर मिल्स एसोसिएशन (IARPMA), इंडियन पल्प एंड पेपर टेक्निकल एसोसिएशन (IPPTA), इंडियन न्यूजप्रिंट मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन (INMA), फेडरेशन ऑफ कोरुगेटेड बॉक्स मैन्युफैक्चरर्स (FCBM) और ऑल इंडिया फेडरेशन ऑफ मास्टरप्रिंटर्स (AIFMP) शामिल थे।
चर्चा के मुख्य विषय और सस्टेनेबिलिटी
कार्यक्रम के दौरान चर्चा मुख्य रूप से पेपर को एक रिन्यूएबल, रिक्रिएबल और बायोडिग्रेडेबल सामग्री के रूप में बढ़ावा देने पर केंद्रित रही। मुख्य विषयों में एग्रोफॉरेस्ट्री के जरिए सस्टेनेबल फाइबर सोर्सिंग, कम कार्बन वाले मैन्युफैक्चरिंग प्रोसेस, रिसोर्स एफिशिएंसी और एडवांस्ड रिसाइक्लिंग तकनीक शामिल थीं। इस कार्यक्रम में सिंगल-यूज प्लास्टिक के फाइबर-बेस्ड विकल्प विकसित करने और जिम्मेदार खपत की वकालत करने के इंडस्ट्री के प्रयासों को भी उजागर किया गया। IPMA के पूर्व अध्यक्ष Mr. Harshpati Singhania ने पेपर को "सर्कुलैरिटी की नींव और सस्टेनेबिलिटी का एक सच्चा उदाहरण" बताया और सभी स्टेकहोल्डर्स से इंडस्ट्री की पर्यावरण पहलों का समर्थन करने का आग्रह किया। IPMA के अध्यक्ष Mr. A. S. Mehta और Mr. Pawan Agarwal ने भी सभा को संबोधित किया और दैनिक जीवन में पेपर की व्यापक भूमिका को रेखांकित किया।
इंडस्ट्री के नेताओं के बयान और सरकारी अपील
1 अगस्त को हुए अन्य कार्यक्रमों में IARPMA के अध्यक्ष Mr. Pramod Agarwal जैसे इंडस्ट्री लीडर्स ने कुशल पेपर प्रोडक्शन और सर्कुलर इकोनॉमी के सिद्धांतों (पुनर्उपयोग, रिकवरी और रिसाइक्लिंग) का पालन करने के महत्व पर जोर दिया। FPTA के अध्यक्ष Mr. Sajjan Kumar Goenka ने भारतीय इंडस्ट्री के लिए National Paper Day के महत्व को रेखांकित किया और सेंट्रल गवर्नमेंट से आधिकारिक मान्यता के लिए एक अनुरोध का जिक्र किया। उन्होंने पेपर के इस्तेमाल के खिलाफ चल रहे प्रोपोगंडा पर भी बात की और स्पष्ट किया कि पेपर का अधिक इस्तेमाल करने से जंगलों का विनाश नहीं होता है। कार्यक्रमों में अधिकारियों ने सरकार से अधिकांश पेपर उत्पादों पर Goods and Services Tax (GST) को 18% से घटाकर 5% करने की अपील की, जिसमें पेपर की पर्यावरण के अनुकूल, सस्टेनेबल और पूरी तरह से रिसाइकिल होने वाली प्रकृति को जीवन के विभिन्न पहलुओं के लिए महत्वपूर्ण बताया गया।